DC Shimla Social Media Controversy: शिमला जिला प्रशासन द्वारा जिले की आधिकारिक गतिविधियों, प्रशासनिक कार्यक्रमों और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को आम जनता तक पहुँचाने के लिए ‘डीसी शिमला’ नाम से कई फेसबुक पेज और अकाउंट को संचालित किया जा रहा है। आम नागरिकों के लिए इस नाम से जुड़े अकाउंट और पेज सरकारी आदेशों, दिशानिर्देशों और महत्वपूर्ण घोषणाओं का एक प्रमुख व आधिकारिक माध्यम है। हालांकि, हाल ही में इस प्लेटफॉर्म के उपयोग को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
दरअसल, आरोप है कि डीसी शिमला नाम से सोशल मीडिया हैंडल का इस्तेमाल जिला आयुक्त कार्यालय में तैनात एक निजी सहायक (PA) द्वारा अपनी व्यक्तिगत रीलें पोस्ट करने के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस फेसबुक आईडी से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट की प्रोफाइल पिक्चर में बाकायदा ‘डिप्टी कमिश्नर शिमला’ के लोगो का प्रयोग किया गया है। सरकारी मंच पर निजी सामग्री के इस प्रसारण के बाद से स्थानीय स्तर पर और प्रशासनिक गलियारों में विभिन्न तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

किसी भी जिले का आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल आम जनता और प्रशासन के बीच पारदर्शिता एवं त्वरित संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से बनाया जाता है। ऐसे में इस प्लेटफॉर्म पर किसी कर्मचारी या अधिकारी की निजी रीलें सामने आने से यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकारी संसाधनों और आधिकारिक मीडिया हैंडलों का उपयोग व्यक्तिगत प्रचार अथवा मनोरंजन के लिए किया जा सकता है? जनता का मानना है कि सरकारी निर्मित मंच किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं होते।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय के दौरान देश भर में सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया के अनुचित इस्तेमाल के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। कई प्रकरणों में संबंधित विभागों द्वारा कड़ा संज्ञान लेते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई है। जब प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के निजी सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर सख्त नियम, आचार संहिता और सीमाओं की बात की जाती है, तो ऐसे में जिले के मुख्य आधिकारिक पेज सोशल मीडिया हैंडलों पर निजी वीडियो शेयर किया जाना मर्यादाओं के विपरीत प्रतीत होता है।
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का स्पष्ट कहना है कि सरकारी सोशल मीडिया पेज जनता को सटीक व आधिकारिक सूचनाएँ देने का सशक्त माध्यम है, इसलिए इस पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री भी पूरी तरह से इसी उद्देश्य के अनुरूप और गरिमापूर्ण होनी चाहिए। आधिकारिक लोगो और पेज की विश्वसनीयता का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले को किस नजरिए से देखता है और क्या सोशल मीडिया संचालन को लेकर कोई नई गाइडलाइन्स जारी की जाती हैं। “हालांकि, मामला चर्चा में आने के बाद अभी-अभी खबर लिखे जाने के दौरान इस अकाउंट को बंद कर दिया गया है।”


















