Shimla News: हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में विभागीय नियमों के उल्लंघन और धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। विदेश यात्रा की विभागीय अनुमति प्राप्त करने के लिए फर्जी वित्तीय स्पॉन्सरशिप दस्तावेज का सहारा लेने के आरोप में एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस गया है। जानकारी के मुताबिक शिमला स्थित ढली पुलिस स्टेशन में इंस्पैक्टर विजय कुमार के विरुद्ध संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस प्रशासन इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रहा है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, वर्ष 2025 में जुन्गा स्थित प्रथम हिमाचल प्रदेश सशस्त्र पुलिस (HPAP) बटालियन में तैनात रहे इंस्पैक्टर विजय कुमार, जो उस समय हिमाचल प्रदेश पुलिस ऑर्केस्ट्रा के प्रभारी थे, ने विदेश जाने के लिए पुलिस मुख्यालय से अनुमति (NOC) मांगी थी। उन्होंने लंदन स्थित ‘हाऊस ऑफ लॉर्ड्स’ में आयोजित “विकसित भारत के लिए पाठ्यक्रम तैयार करना-2047” विषयक चर्चा में शामिल होने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।

विभागीय स्वीकृति प्राप्त करने के उद्देश्य से इंस्पैक्टर विजय कुमार ने पुलिस मुख्यालय में अरनी विश्वविद्यालय (Arni University) का एक वित्तीय स्पॉन्सरशिप पत्र जमा कराया था। इस पत्र के आधार पर उन्होंने दावा किया था कि उनकी इस अंतरराष्ट्रीय यात्रा, रहने और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं का पूरा वित्तीय खर्च अरनी विश्वविद्यालय द्वारा वहन किया जाएगा। विभागीय औपचारिकताओं के तहत जब जमा किए गए स्पॉन्सरशिप दस्तावेज का सत्यापन कराया गया, तो पूरी स्थिति स्पष्ट हुई।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि अरनी विश्वविद्यालय द्वारा अधिकारी को किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या फंड प्रदान नहीं किया गया था। रिकॉर्ड के सत्यापन से खुलासा हुआ कि विदेश यात्रा का कुल खर्च लगभग 1.57 लाख रुपये था। इस पूरी राशि का भुगतान इंस्पैक्टर विजय कुमार और उनकी पत्नी के निजी बैंक खातों के जरिए एक ट्रैवल एजेंसी को किया गया था। इस प्रकार पुलिस मुख्यालय में गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए गए थे।
मामले के तूल पकड़ने पर अरनी विश्वविद्यालय की ओर से भी आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से जारी किया गया पत्र केवल अधिकारी को वीजा और पुलिस विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से दिया गया था, न कि किसी वित्तीय प्रायोजन के लिए।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस संदर्भ में शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि ढली पुलिस थाने में आरोपी अधिकारी के खिलाफ उपयुक्त धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस विभाग इस धोखाधड़ी और भ्रामक जानकारी देने के मामले के प्रत्येक पहलू की सूक्ष्मता और गंभीरता से जांच कर रहा है, ताकि अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा सके।


















