Himachal Pradesh Debt: हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति वर्तमान में अत्यंत चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को ANI को दिए एक साक्षात्कार में इस बात का खुलासा किया कि राज्य पर कर्ज का बोझ अब 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच गया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि यह ऋण पूर्ववर्ती सरकारों के समय से लगातार बढ़ रहा है।
उनके अनुसार, पहले यह 45,000 करोड़ रुपये था, जो पिछली सरकार के कार्यकाल में 75,000 करोड़ रुपये हुआ और अब यह खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। मंत्री ने वितीय भुगतानों में हो रही देरी को ‘राजनीतिक फैसला’ मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “यह कदम केवल प्रतीकात्मक है ताकि यह संदेश जाए कि आर्थिक संकट की इस घड़ी में हम सब साथ हैं। इससे पहले कोविड के दौरान भी वेतन स्थगित किए गए थे। जैसे ही स्थिति में सुधार होगा, यह बकाया राशि सरकार की जिम्मेदारी होगी और इसका भुगतान किया जाएगा।”
राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से बढ़ी मुसीबत
विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने को राज्य की वित्तीय बाधाओं का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि इस अनुदान के रुकने से राज्य की विकास योजनाओं और दैनिक खर्चों के प्रबंधन में कठिनाई आ रही है। सरकार वर्तमान में राज्य को इस संकट से बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
बता दें कि इसी विषय पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि वह राज्य के अधिकारों की लड़ाई में साथ देने के बजाय केवल राजनीति कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा ने राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर हिमाचल के लोगों का साथ नहीं दिया। विपक्ष केवल बयानबाजी में लगा है, जबकि हमारी सरकार अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही




















