Rampur Bus Accident: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला अंतर्गत रामपुर उपमंडल के कोठाधार में दो दिन पहले हुए हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। एचआरटीसी की मंडल स्तरीय निरीक्षण समिति की जांच में यह खुलासा हुआ है कि दुर्घटना के समय बस में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। जांच दल के मुताबिक, जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां सड़क का बाहरी किनारा धंसा हुआ था और उसे नीचे से पर्याप्त सहारा नहीं मिल रहा था।
सड़क का किनारा कमजोर होने के कारण बस का पिछला हिस्सा अचानक नीचे की तरफ खिसक गया। इसके बाद अनियंत्रित होकर बस करीब 150 मीटर नीचे घाटी में स्थित कृषि भूमि तक लुढ़कती चली गई। निरीक्षण समिति ने दुर्घटनास्थल की पैमाइश में पाया कि वहां सड़क की कुल चौड़ाई महज 2.63 मीटर थी, जबकि दुर्घटनाग्रस्त बस की चौड़ाई 2.34 मीटर थी। इस बेहद कम अंतर और धंसे हुए किनारे की वजह से चालक बस को संभाल नहीं सका।

यह दर्दनाक हादसा 15 जुलाई की शाम करीब साढ़े छह बजे रामपुर-खड़ाहण-कोटाधार-खोलीघाट मार्ग पर गरटोला के पास हुआ था। हादसे के अगले दिन शिमला मंडल के मंडलीय प्रबंधक की अध्यक्षता में गठित विशेष निरीक्षण समिति ने बस के मलबे और दुर्घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। यांत्रिक जांच के दौरान बस की फ्रंट स्प्रिंग लीफ (कमानी), टाई-रॉड एंड, ब्रेक सिस्टम और ब्रेक प्रेशर पाइप समेत सभी प्रमुख हिस्से पूरी तरह सही हालत में पाए गए।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बस संख्या HP 06A 6454 में ऐसी कोई यांत्रिक खराबी नहीं थी, जिसे इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सके। शुरुआती जांच के निष्कर्ष पूरी तरह से सड़क के धंसे हुए बाहरी किनारे और मार्ग की सीमित चौड़ाई की ओर इशारा करते हैं। इस बीच पुलिस प्रशासन भी अपने स्तर पर हादसे के अन्य संभावित कारणों और कानूनी पहलुओं की गहनता से जांच कर रहा है।
इस दु:खद हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर अब तीन हो गई है। बुधवार को हुए इस हादसे के दौरान बस के परिचालक (कंडक्टर) और एक बुजुर्ग यात्री की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद अस्पताल में उपचाराधीन गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान बस परिचालक जय प्रकाश नेगी और 72 वर्षीय बुजुर्ग यात्री डाकू राम के रूप में हुई है।
हादसे के समय एचआरटीसी की इस बस में कुल 22 यात्री सवार थे। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। हादसे में घायल हुए अन्य सभी यात्रियों का इलाज इस समय खनेरी (रामपुर) स्थित महात्मा गांधी सेवा चिकित्सा परिसर में चल रहा है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।


















