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Crypto Fraud Case: 500 करोड़ की ठगी में ईडी का बड़ा एक्शन, 3 गिरफ्तार

ईडी ने हिमाचल और पंजाब में सक्रिय 500 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 दिनों की रिमांड पर लिया है। इस धोखाधड़ी से करीब 2.48 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
Crypto Fraud Case: 500 करोड़ की ठगी में ईडी का बड़ा एक्शन, 3 गिरफ्तार

Crypto Fraud Case: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला सब-जोनल कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब में दर्ज मामलों से जुड़े बहुचर्चित कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा के रूप में हुई है। इन तीनों पर लाखों निवेशकों के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क का हिस्सा होने का गंभीर आरोप है।

प्रवर्तन निदेशालय के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को इस कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि ईडी ने इन तीनों आरोपियों को धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 की धारा 19(1) के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद, जांच एजेंसी द्वारा तीनों आरोपियों को शिमला स्थित विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया गया। ईडी ने मामले की गहराई से जांच करने और वित्तीय कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपियों की कस्टडी की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने तीनों को 12 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है।

ईडी द्वारा शुरू की गई यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच मूल रूप से हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकियों पर आधारित है। पुलिस ने यह एफआईआर मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा और उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज की थीं। राज्य पुलिस की जांच रिपोर्ट और इन प्राथमिकियों का संज्ञान लेते हुए ईडी ने वित्तीय अनियमितताओं की जांच अपने हाथ में ली। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से लोगों को ठगने के लिए एक पूरा तंत्र तैयार किया हुआ था।

जांच एजेंसियों और ईडी की पड़ताल में इस पूरे नेक्सस का विस्तृत तौर-तरीका (मोडस ऑपेरेंडी) सामने आया है। जांच के अनुसार, आरोपियों ने कोर्वियो (Korvio), डीजीटी (DGT), हाइपनैक्स्ट (Hypnext) और ए-ग्लोबल (A-Global) जैसे कई फर्जी और छद्म निवेश मंच (इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स) बना रखे थे। इन मंचों के माध्यम से आम लोगों को बहुत अधिक और पूरी तरह से निश्चित मुनाफा देने का लालच दिया जाता था। इस भ्रामक प्रचार और ऊंचे रिटर्न के झांसे में आकर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई इन प्लेटफॉर्म्स में निवेश कर दी।

आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरी धोखाधड़ी की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा ने हेम राज, मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना का खाका तैयार किया था। इस योजना को संचालित करने के लिए शुरुआत में एक ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया। बाद में इस प्लेटफॉर्म को डिजिटल ओशन के विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया गया, ताकि स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके। इसे मुख्य रूप से korvio.io और voscrow.com जैसे इंटरनेट डोमेन के जरिए चलाया जा रहा था।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस गिरोह ने लोगों को विशेष रूप से ‘कोर्वियो कॉइन’ (केआरओ) में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था। निवेशकों को यह झूठा भरोसा दिलाया गया था कि इस विशिष्ट कॉइन में निवेश करने पर उन्हें अत्यधिक और निश्चित मुनाफा प्राप्त होगा। इस फर्जी योजना को लोकप्रिय बनाने और लोगों का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार कार्यक्रम और इवेंट्स आयोजित किए गए थे। इसके साथ ही, तकनीकी स्तर पर हेरफेर करके टोकन की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया और घटाया जाता था ताकि लोगों को वास्तविक व्यापार का भ्रम हो सके।

जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी व्यवस्था पूरी तरह से एक पोंजी स्कीम की तरह चलाई जा रही थी। इसमें किसी भी प्रकार का वास्तविक व्यापार या वैध निवेश नहीं हो रहा था। इस योजना के तहत पुराने निवेशकों को मुनाफा या भुगतान करने के लिए किसी वास्तविक लाभ का उपयोग नहीं किया जाता था, बल्कि बाजार से जुड़ने वाले नए निवेशकों से जुटाई गई रकम को ही रोटेट किया जाता था। जब नए निवेशकों का पैसा आना बंद हुआ, तब यह पूरा ढांचा ढह गया, जिससे देश के 2.48 लाख लोगों के करीब 500 करोड़ रुपये डूब गए। फिलहाल ईडी रिमांड के दौरान तीनों आरोपियों से इस फंड की ट्रेल और मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा के ठिकानों के बारे में पूछताछ कर रही है।

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