Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के विश्वविख्यात श्री संकट मोचन मंदिर में चोरी की एक बड़ी वारदात सामने आई है। नीम करोली बाबा द्वारा स्थापित और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले इस प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल में सेंधमारी की घटना से पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। शहर के मध्य में स्थित इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थान पर इस तरह की वारदात होना राजधानी की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगाता है।
यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भक्ति और विश्वास का केंद्र है। ऐसे प्रतिष्ठित और सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान पर अज्ञात अपराधी द्वारा बेखौफ होकर घटना को अंजाम दिया जाना पुलिस की चौकसी का पर्दाफाश करता है। घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में गहरा रोष व्याप्त है, वहीं शिमला की गश्त व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण तंत्र पर भी उंगलियां उठ रही हैं।
गर्भगृह से सोने-चांदी के आभूषण और नकदी गायब
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अज्ञात चोर मंदिर के अत्यंत संवेदनशील हिस्से यानी गर्भगृह तक पहुंचने में कामयाब रहा। शातिर अपराधी ने गर्भगृह में स्थापित मूर्तियों से भगवान के चांदी के तीन मुकुट उतार लिए। इसके अतिरिक्त, माता सीता की प्रतिमा पर सुशोभित लगभग एक तोला वजनी सोने की नथ भी चोरी कर ली गई।
आभूषणों के अलावा, मंदिर परिसर में रखे दानपात्र के ताले तोड़कर उसमें रखी नकदी भी साफ कर दी गई है। मंदिर परिसर में इस स्तर की सेंधमारी होना यह दर्शाता है कि अपराधी ने वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बनाई थी, जबकि वहां तैनात सुरक्षा व्यवस्था इसका सुराग पाने में नाकाम रही।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज
घटना की सूचना मिलने के बाद शिमला पुलिस प्रशासन हरकत में आया। मामले को लेकर पुलिस थाना पश्चिम, जिला शिमला में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने 1 नवंबर 2026 को अभियोग संख्या 236/2026 दर्ज किया है। यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) और धारा 305(D) के तहत पंजीकृत की गई है। दर्ज मामले के आधार पर पुलिस की फॉरेंसिक टीम और जांच अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राजधानी शिमला की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से शिमला शहर में आपराधिक गतिविधियों में हो रही बढ़ोतरी से आम नागरिकों के बीच असुरक्षा का माहौल पनप रहा है। संकट मोचन मंदिर जैसे हाई-प्रोफाइल धार्मिक स्थल में हुई इस चोरी ने आम जनता की चिंता को और बढ़ा दिया है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हिमाचल सचिवालय सहित पुलिस मुख्यालय सहित विभिन्न बड़े सरकारी संस्थान और मुख्य कार्यालय भी है।
ऐसे में स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब राजधानी के इतने प्रमुख और संवेदनशील स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो आम नागरिकों के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और संपत्ति की सुरक्षा की क्या गारंटी है? इस घटना ने शिमला पुलिस की उस कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है जिसका मुख्य उद्देश्य अपराधियों में कानून का भय बनाए रखना है।
पुलिस की कार्रवाई और मामले की गहन जांच जारी
वारदात के उजागर होने के बाद जिला शिमला पुलिस की विभिन्न टीमें अज्ञात आरोपी की तलाश में जुट गई हैं। पुलिस आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है।
प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जा रही है और चोरी में संलिप्त अज्ञात व्यक्ति को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, नागरिकों और श्रद्धालुओं की मांग है कि पुलिस न केवल इस मामले को जल्द सुलझाए, बल्कि शिमला के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों और आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा समीक्षा कर गश्त को कड़ा करे।




















