Shimla News Yudhveer Bains allegations: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आज सुबह उस समय राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया, जब कांग्रेस नेता युद्धवीर बैंस और पुलिस बल के बीच बीच सड़क पर तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने से आक्रोशित बैंस ने राज्य सरकार और प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। इस घटना का वीडियो भी अब वायरल हुआ है।
“मेरी हत्या की रची जा रही है साजिश”
घटना के दौरान युद्धवीर बैंस जबरदस्त गुस्से में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद मीडिया और जनता के सामने दावा किया कि उन्हें अगवा कर उनकी हत्या करने की साजिश रची जा रही है। बैंस का आरोप है कि चूंकि उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) में शिकायत दर्ज कराई है, इसलिए अब मुख्यमंत्री उन्हें रास्ते से हटवाना चाहते हैं।
बैंस का आरोप है कि उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ ईडी को शिकायत दे रखी है, जिसके चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और पुलिस उन्हें अगवा करना चाहती है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी जिम्मेदार होंगे। युद्धवीर बैंस ने बाद में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए प्रदेश सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों का कहना था कि उन्हें केवल ‘वेरिफिकेशन’ करने के आदेश मिले हैं, जिसके तहत उन्हें रोका गया। हालांकि, नेता इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए और घंटों तक बीच सड़क पर हंगामा चलता रहा। काफी देर तक रास्ता रोके जाने के कारण माहौल तनावपूर्ण बना रहा और इसे बैंस ने “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया।
कौन हैं युद्धवीर सिंह और क्या है उनसे जुड़ा पूरा मामला?
बता दें कि युद्धवीर बैंस मंडी निवासी एक कारोबारी हैं, जो मनाली में एक होटल परियोजना के लिए कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक (KCCB) से लिए गए 65 करोड़ रुपये के ऋण और उसमें हुई भारी अनियमितताओं के कारण चर्चा में हैं। यह मामला मुख्य रूप से पूर्व कांग्रेस सरकार (2012 से 2017) के बीच का है, जब बैंक प्रबंधन ने नाबार्ड (NABARD) और आरबीआई के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर बिना अनुमति के ऋण स्वीकृत किया था।
नियमों के अनुसार, नाबार्ड की मंजूरी के बिना किसी व्यक्ति को 40 लाख रुपये से अधिक का ऋण नहीं दिया जा सकता, जबकि यहाँ नियमों को ताक पर रखकर लाभार्थी को सीधे 20 करोड़ रुपये वितरित किए गए। ऋण की पहली किस्त बैंक के एमडी की सहमति के बिना ही ऊना शाखा से जारी की गई थी। यह मामला तब और अधिक विवादित हो गया जब पता चला कि ऋण लेने वाले लाभार्थी ने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के विवेकानंद ट्रस्ट को 11 लाख रुपये दान किए थे, जिसे बाद में विवाद बढ़ने पर शांता कुमार ने वापस कर दिया था।
वर्तमान में युद्धवीर बैंस कांगड़ा बैंक के डिफॉल्टर घोषित हैं और कई स्तर की जांच का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि भाजपा सरकार के समय जांच शुरू होने के बावजूद बैंक प्रबंधन ने उन्हें 20 करोड़ रुपये और जारी कर दिए थे। वर्तमान में सतर्कता ब्यूरो (Vigilance) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है, जिसमें बैंक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि उन्हें गृह मंत्रालय से सुरक्षा भी प्रदान है। फिलहाल इस पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
दरअसल , यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सत्ताधारी दल के एक नेता ने अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री पर सीधे तौर पर जान से मारने की धमकी और षड्यंत्र के आरोप लगाए हैं। जहां एक ओर पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने की जद्दोजहद करती दिखी, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने शिमला के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। फिलहाल, इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।




















