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Shimla News: “परिवार का पहला शिक्षक बनने का गौरव”, दीक्षित ने JBT बनकर साकार किया माता-पिता का वर्षों पुराना सपना, पूरे गांव में जश्न

शिमला जिले की कुपवी तहसील के एक छोटे से गांव से निकलकर दीक्षित ने हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग की JBT परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। माता-पिता के त्याग और वर्षों के सपने को समर्पित इस सफलता की पूरी कहानी।
Updated By PNT
Published on: 15 अगस्त 2026
Shimla News: माता-पिता के त्याग से बदला बेटा को मिला मुकाम, कुपवी के दीक्षित बने परिवार के पहले JBT शिक्षक, पूरे गांव में जश्न

Shimla News: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की कुपवी तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव किमाही (डाकघर कांडा बनाह) में इस समय उत्सव का माहौल है। यहां के निवासी दीक्षित ने जूनियर बेसिक टीचर (JBT) के पद पर चयनित होकर अपने परिवार और पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। दीक्षित की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह अपने परिवार के इतिहास में शिक्षक बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। इससे पूर्व उनके परिवार में कोई भी इस पेशे से नहीं जुड़ा था।

हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग, हमीरपुर द्वारा जूनियर बेसिक टीचर (जॉब ट्रेनी), पोस्ट कोड-25004 के कुल 600 पदों के लिए अंतिम परिणाम घोषित किया गया है। इस प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल कर दीक्षित ने अपने वर्षों के परिश्रम को परिणाम में बदल दिया है। परिणाम आने के बाद से ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

दीक्षित के पिता लायक राम और माता गुमती देवी का वर्षों से यह सपना था कि उनका बेटा पढ़-लिखकर शिक्षा के क्षेत्र में जाए और एक सम्मानित शिक्षक बने। जब दीक्षित छोटे थे, तभी से उनके माता-पिता ने उनके लिए यह लक्ष्य तय किया था। दीक्षित ने भी अपने माता-पिता के इस विचार को अपना एकमात्र लक्ष्य मान लिया और पूरी निष्ठा व लगन के साथ JBT परीक्षा की तैयारी में जुट गए।

इस सफलता का मार्ग दीक्षित के लिए सहज नहीं था। उनके पिता लायक राम ने सीमित साधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए यह सुनिश्चित किया कि संसाधनों की कमी बच्चों के भविष्य के आड़े न आए। वहीं, माता गुमती देवी ने परिवार को संभालते हुए हर कदम पर त्याग और सहयोग दिया।

अपनी सफलता पर बात करते हुए दीक्षित अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और अपने गुरुजनों को देते हैं। दीक्षित का कहना है कि माता-पिता के आशीर्वाद, उनके द्वारा किए गए त्याग और शिक्षकों के सही मार्गदर्शन के बिना इस मुकाम तक पहुंचना असंभव था। मुश्किल समय में भी उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान भटकने नहीं दिया और निरंतर अध्ययन करते रहे।

दीक्षित का JBT शिक्षक बनना केवल एक सरकारी नौकरी की प्राप्ति नहीं है, बल्कि यह एक ग्रामीण परिवार के वर्षों के संघर्ष, त्याग और उम्मीदों की जीत है। किमाही और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए दीक्षित की यह सफलता एक प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सीमित साधनों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद सफलता प्राप्त की जा सकती है।

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