Sirmaur Land Fraud Case: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के धौलाकुआं क्षेत्र में जमीन का विवाद निपटाने और निशानदेही करवाने के नाम पर 10 लाख रुपये की कथित ठगी का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित की शिकायत के आधार पर माजरा पुलिस थाने में एक कानूनगो समेत चार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता का गंभीर आरोप है कि मोटी रकम ऐंठने के बावजूद न तो उसकी जमीन की निशानदेही करवाई गई और न ही अदालत में लंबित विवाद को समाप्त कराया गया। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम, वित्तीय लेन-देन और आरोपियों की आपसी मिलीभगत की गहनता से जांच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता रफीक मोहम्मद द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, उसने धौलाकुआं स्थित करीब 11 बीघा जमीन खरीदी थी। जमीन की खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया पूरी होने के कुछ महीनों बाद जब उसने नियमानुसार जमीन की निशानदेही करवाने के लिए संबंधित राजस्व विभाग में आवेदन किया, तब उसे एक चौंकाने वाली जानकारी मिली।
कानूनगो परमजीत सिंह ने उसे सूचित किया कि जिस जमीन की निशानदेही के लिए उसने आवेदन दिया है, उससे संबंधित एक मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन चल रहा है। इसके बाद मामले को निपटाने के नाम पर साजिश रची गई। आरोप है कि लंबित कोर्ट केस को पूरी तरह से समाप्त करवाने और जमीन की निशानदेही को सुगम बनाने के बदले शिकायतकर्ता से 10 लाख रुपये की भारी-भरकम मांग की गई।
सिरमौर के पुलिस अधीक्षक एनएस नेगी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार 25 जनवरी को कानूनगो परमजीत सिंह ने उसे फोन करके अपने पास बुलाया था। इसके अगले दिन यानी 26 जनवरी को शिकायतकर्ता अपने गाड़ी चालक के साथ कानूनगो परमजीत के आवास पर पहुंचा। वहां पर कानूनगो के अलावा तीन अन्य व्यक्ति कुलदीप, रविंद्र और धीरज भी पहले से मौजूद थे।
आरोप के मुताबिक, उसी बैठक में जमीन विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने के एवज में कुल 10 लाख रुपये देने का सौदा तय किया गया। दबाव और स्थिति को देखते हुए शिकायतकर्ता ने तत्काल 1.50 लाख रुपये की नकद राशि कानूनगो परमजीत को सौंप दी। इसके बाद पूर्व निर्धारित योजना के तहत 28 जनवरी को शेष 8.50 लाख रुपये की राशि अन्य आरोपी व्यक्तियों को देने का दावा किया गया है। शिकायत में यह भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि आरोपियों ने लेन-देन का कोई डिजिटल प्रमाण न रहे, इसलिए पूरी रकम केवल नकद के रूप में ही देने की शर्त रखी थी।
रकम का भुगतान हो जाने के बाद भी जब काफी समय बीत गया, तब भी जमीन की निशानदेही को लगातार किसी न किसी बहाने से टाला जाता रहा। जब शिकायतकर्ता ने निशानदेही पर जोर दिया या आरोपियों के कहने पर जमीन पर जाने का प्रयास किया, तो अन्य आरोपियों द्वारा उसे कथित तौर पर गंभीर धमकियां दी गईं। विवाद न सुलझने और खुद को ठगा हुआ महसूस करने पर जब पीड़ित ने अपनी दी हुई 10 लाख रुपये की राशि वापस मांगी, तो उसे अंजाम भुगतने की धमकियां दी जाने लगीं। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस पूरे घटनाक्रम और लेन-देन की उसके पास वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है।
माजरा पुलिस ने शिकायतकर्ता रफीक मोहम्मद के बयान और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर कानूनगो परमजीत सिंह, कुलदीप, रविंद्र और धीरज के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है।
शिकायत में चारों आरोपियों के बीच सुनियोजित मिलीभगत का स्पष्ट आरोप लगाया गया है। इस बीच कानूनी शिकंजा कसते देख चारों आरोपियों ने अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, जिसे माननीय अदालत ने खारिज कर दिया है। पुलिस प्रशासन अब मामले में नकद लेन-देन, वीडियो साक्ष्यों, जमीन के रिकॉर्ड और कोर्ट केस से जुड़े पहलुओं की बारीकी से छानबीन कर रहा है।


















