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Solan News: मोहित कुमार की शिकायत पर NCSC एक्शन में, अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू

Mohit Kumar NCSC Case: मोहित कुमार के साथ हुए कथित अत्याचार मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों की भूमिका पर आयोग द्वारा नियमानुसार कदम उठाए जा रहे हैं।
Published on: 10 August 2026
Solan News: मोहित कुमार की शिकायत पर NCSC एक्शन में, अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू

Solan News: सोलन जिला कंडाघाट में मोहित कुमार के साथ कथित तौर पर हुए अत्याचार एवं उत्पीड़न के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग की ओर से शिकायतकर्ता को भेजे गए संचार में बताया गया है कि संदर्भ संख्या NCSCRN334535 को अग्रेषित कार्रवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है, जबकि इस मामले की शिकायत संख्या APCR/OL/HP/2026/334535 है।

आयोग की ओर से प्राप्त इस सूचना से स्पष्ट है कि मोहित कुमार द्वारा प्रस्तुत शिकायत को आयोग के स्तर पर आगे की कार्रवाई के लिए स्वीकार किया गया है। शिकायत में संबंधित अधिकारियों द्वारा कथित रूप से किए गए अत्याचार, उत्पीड़न एवं अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप उठाए गए हैं। अब मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आयोग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की संभावना है।

शिकायतकर्ता को प्राप्त आयोग के संचार ने इस मामले को एक नया संस्थागत आयाम दे दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग संबंधित अधिकारियों से क्या जवाब मांगता है तथा शिकायत में उठाए गए आरोपों की जांच किस प्रकार आगे बढ़ती है। आयोग द्वारा शिकायत को अग्रेषित कार्रवाई के लिए स्वीकार किया जाना इस बात का संकेत है कि मामले को संबंधित मंच पर विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया गया है।

क्या है मोहित कुमार उत्पीड़न से जुडा पूरा मामला
दरअसल सोलन जिला में 14 जून 2025 की एक घटना के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचा है। साधुपुल, कल्होग, जिला सोलन निवासी मोहित कुमार ने आरोप लगाया है कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के वाहन को रास्ता न दे पाने के बाद उनके विरुद्ध द्वेषपूर्ण कार्रवाई की गई, जिसके बाद मामला बढ़ता चला गया और अंततः उन्हें पुलिस की ओर से कथित रूप से उत्पीड़न तथा झूठे मामलों में फंसाए जाने का भय पैदा हो गया।

मोहित कुमार के अनुसार, 14 जून 2025 को वह एक निजी कंपनी में अपना काम पूरा करने के बाद अपनी पत्नी के साथ भारत पेट्रोलियम पेट्रोल पंप से अपने गांव साधुपुल की ओर जा रहे थे। पेट्रोल पंप से कंडाघाट की ओर लगभग 300 मीटर आगे जाने के बाद पीछे से जिला सोलन के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के वाहन ने लगातार सायरन बजाया। उस समय सामने से वाहनों की भारी आवाजाही थी और मोहित कुमार लगभग 25–30 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से वाहन चला रहे थे। उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में वह लगभग 100 मीटर तक पुलिस अधिकारी के वाहन को रास्ता नहीं दे सके।

मोहित कुमार के अनुसार, कंडाघाट पहुंचने पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, सोलन के निर्देश पर उनका वाहन रोका गया और उनके विरुद्ध मोबाइल फोन के दुरुपयोग तथा लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में चालान किया गया। मोहित कुमार ने इस कार्रवाई का विरोध किया और दावा किया कि उनके वाहन में लगे डैशकैम में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई थी। उनके अनुसार, वीडियो रिकॉर्डिंग में चालान में लगाए गए आरोपों को साबित करने वाला कोई ठोस आधार नहीं था।

मोहित कुमार ने इसके बाद एक समाचार चैनल से संपर्क कर पूरी घटना सार्वजनिक की। ट्रांसपोर्ट टीवी ने इस घटना को प्रसारित किया और उनके वाहन में रिकॉर्ड किए गए डैशकैम वीडियो भी प्रकाशित किए। इसके बाद, मोहित कुमार के अनुसार, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, सोलन के पीएसओ की शिकायत के आधार पर उनके तथा संबंधित समाचार चैनल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया।

मोहित कुमार का कहना है कि उन्होंने इस कार्रवाई के विरुद्ध कई स्तरों पर अभ्यावेदन दिए और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन उनके आरोपों पर अपेक्षित प्रभावी जांच नहीं हुई। उनका यह भी दावा है कि बाद में मोटर वाहन अधिनियम के तहत जारी किए गए चालान के मूल तथ्यों की जांच में आरोपों की सत्यता पर गंभीर प्रश्न उठे और प्रथम दृष्टया चालान में उल्लिखित तथ्यों के गलत अथवा मनगढ़ंत होने की बात सामने आई।

इस बीच, पीएसओ की शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में मोहित कुमार को न्यायालय से जमानती वारंट भी प्राप्त हुआ है। उनका कहना है कि मामला अब उनके लिए केवल एक यातायात चालान का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह उनके मौलिक अधिकारों, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।

डैशकैम रिकॉर्डिंग के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि मोहित कुमार न तो लापरवाही और तेज गति से वाहन चला रहे थे और न ही उन्होंने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था। जांच के दौरान (सीडीआर) काल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण से भी यह तथ्य सामने आया कि मोहित कुमार द्वारा उस समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं किया गया था।

ऐसे में यह गंभीर सवाल उठता है कि केवल इसलिए कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का सरकारी वाहन मोहित कुमार के वाहन को ओवरटेक नहीं कर सका, उन्होंने अपने पद और अधिकार का कथित रूप से दुरुपयोग क्यों किया? केवल सरकारी वाहन को रास्ता न मिलने की स्थिति में एक आम नागरिक के विरुद्ध इस प्रकार की कार्रवाई किए जाने के कारणों की गंभीर और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यह पूरा घटनाक्रम अपने आप में एक गंभीर जांच का विषय है।

दैनिक डायरी में शिकायत दर्ज करना भी बना विवाद
हाल ही में 22 अप्रैल 2026 मोहित कुमार पुलिस थाना कंडाघाट पहुंचे और उन्होंने अपने साथ कथित जातिगत उत्पीड़न तथा पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की आशंका के संबंध में अपनी शिकायत रखी। उनके अनुसार, थाना प्रभारी मुकुल शर्मा ने उनकी बात को दैनिक डायरी में दर्ज किया।

मोहित कुमार का आरोप है कि इसके बाद थाना प्रभारी मुकुल शर्मा को पुलिस अधीक्षक, सोलन द्वारा निलंबित कर दिया गया। मोहित कुमार के अनुसार, यदि किसी शिकायतकर्ता की शिकायत को पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज करना ही विभागीय कार्रवाई का आधार बन जाए, तो इससे कमजोर वर्गों के लोगों में पुलिस के समक्ष शिकायत करने को लेकर भय पैदा होना स्वाभाविक है।

“अगर शिकायत दर्ज करने पर पुलिस अधिकारी निलंबित हो सकता है, तो मेरी सुरक्षा कौन करेगा?”
मोहित कुमार का कहना है कि इस घटनाक्रम ने उनके मन में गंभीर भय पैदा कर दिया है। उनका आरोप है कि उन्हें आशंका है कि प्रभावशाली पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत करने के कारण उन्हें आगे किसी झूठे मामले, यहां तक कि मादक पदार्थ के मामले में भी फंसाया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि उनकी शिकायत दर्ज करने वाले थाना प्रभारी को ही कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, तो उन्हें अपने विरुद्ध पुलिस शक्ति के संभावित दुरुपयोग का डर बना हुआ है।

मोहित कुमार ने अपनी शिकायत लेकर जिला मजिस्ट्रेट, सोलन के कार्यालय का भी रुख किया। उनके अनुसार, वह लगभग चार घंटे तक कार्यालय के बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी प्रभावी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने नए पुलिस अधीक्षक, सोलन से भी मुलाकात की। मोहित कुमार के अनुसार, उन्हें वहां से भी यह जवाब मिला कि इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता।

अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राज्यपाल से गुहार

स्थानीय स्तर पर कथित रूप से प्रभावी राहत नहीं मिलने के बाद मोहित कुमार ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से संपर्क किया है। उन्होंने आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, कथित जातिगत उत्पीड़न की जांच तथा पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने का अनुरोध किया है। मोहित कुमार ने हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल से भी हस्तक्षेप की मांग की है।

उनका कहना है कि जब किसी अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित व्यक्ति को यह महसूस हो कि स्थानीय स्तर पर उसकी शिकायत की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो रही है और प्रभावशाली अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत करने के बाद उसके ऊपर ही कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है, तो संवैधानिक संस्थाओं का दरवाजा खटखटाना ही उसके लिए अंतिम विकल्प रह जाता है।

“जब सीएम के सुरक्षा प्रभारी को थप्पड़ मार सकते हैं, तो मैं तो आम नागरिक हूँ…”
मोहित का कहना है कि उक्त अधिकारी जब कुल्लू जिला के एसपी थे, तब 23 जून 2021 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दौरे के दौरान उनकी तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सुरक्षा प्रभारी (एएसपी) बृजेश सूद से तीखी बहस हो गई थी। बात इतनी बिगड़ गई कि एसपी गौरव सिंह ने आपा खोकर एएसपी बृजेश सूद को थप्पड़ जड़ दिया था।

मोहित का कहना है, “जब वे मुख्यमंत्री के करीबी सुरक्षा अधिकारी के साथ ऐसी हरकत कर सकते हैं, तो मैं तो एक आम नागरिक हूँ, मेरी क्या हस्ती है? मुझे तो पहले से ही बड़ा अपराधी बना रखा है”, और जिसकी वजह से मैं आज तक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहा हूँ और आगे न जाने कितने समय तक ऐसा चलेगा।

मामला अब एक व्यक्ति से आगे बढ़कर संस्थागत जवाबदेही का सवाल
मोहित कुमार का मामला अब केवल एक चालान, एक एफआईआर अथवा एक पुलिस कार्रवाई का विषय नहीं रह गया है। इससे यह गंभीर सवाल उठता है कि क्या कमजोर वर्ग के किसी नागरिक को प्रभावशाली अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत करने पर समान सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई मिल रही है?

क्या पुलिस के पास पहुंचने वाले प्रत्येक नागरिक की शिकायत बिना किसी भय या दबाव के दर्ज की जा सकती है? और क्या किसी शिकायतकर्ता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए स्थानीय तंत्र से बाहर संवैधानिक संस्थाओं का सहारा लेने के लिए मजबूर होना चाहिए?

इन्हीं सवालों के जवाब की मांग करते हुए मोहित कुमार ने अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल से हस्तक्षेप तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है

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