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दो सूटकेस से विश्व कप तक, Shubham Ranjane की अमेरिका पहुंचने वाली क्रिकेट कहानी

USA All-Rounder Shubham Ranjane: मुंबई और गोवा से होते हुए अमेरिका तक का सफर तय करने वाले शुभम रांजणे अब टी 20 विश्व कप 2026 में USA की ओर से भारत के खिलाफ खेल रहे हैं।
दो सूटकेस से विश्व कप तक, Shubham Ranjane की अमेरिका पहुंचने वाली क्रिकेट कहानी
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Shubham Ranjane Cricket Journey: मुंबई और गोवा से होते हुए अमेरिका तक का सफर तय करने वाले शुभम रांजणे अब टी-20 विश्व कप में USA की ओर से भारत के खिलाफ खेलने रहे हैं। 2 अगस्त 2022 को शुभम रांजणे और उनकी पत्नी मौसमी पटेल सिर्फ दो सूटकेस लेकर सिएटल पहुंचे थे। उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह फैसला उनकी जिंदगी की दिशा बदल देगा।

भारतीय टीम के लिए नहीं खेल पाने वाले मुंबई के पूर्व ऑलराउंडर रांजणे ने मेजर लीग क्रिकेट खेलने के लिए अमेरिका जाने का साहसिक कदम उठाया था। मीडिया से बात करते हुए रांजणे बताते हैं कि अमेरिका जाने का फैसला आसान नहीं था। मन में हमेशा यही सवाल था कि यह कदम सही साबित होगा या नहीं। उन्हें MLC के प्रस्ताव में नई संभावनाएं दिखीं, खासकर इसलिए क्योंकि इस लीग में आईपीएल मालिकों का निवेश था।

उन्हें तब यह एहसास नहीं था कि कुछ ही वर्षों में वह अमेरिका की राष्ट्रीय टीम से विश्व कप खेलेंगे। अब 31 वर्षीय शुभम रांजणे USA की ओर से गत चैंपियन भारत के खिलाफ अपना पहला विश्व कप मुकाबला खेलने जा रहे हैं। यह पल उनके लिए बेहद भावनात्मक है, क्योंकि एक दशक पहले वह भारत के लिए खेलने का सपना लेकर बेहतर अवसरों की तलाश में मुंबई आए थे।

जब उन्हें पता चला कि भारत के खिलाफ मुकाबला मुंबई में होगा, तो उनके लिए यह यादों से जुड़ा क्षण बन गया। वानखेड़े स्टेडियम से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। वह बताते हैं कि इस मैदान में खेलना हमेशा खास एहसास देता है। शुभम को क्रिकेट से लगाव अपने पिता सुभाष रांजणे से मिला, जो रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र के लिए खेल चुके हैं। उनके दादा वसंत रांजणे भी प्रथम श्रेणी क्रिकेट के चर्चित तेज गेंदबाज रहे हैं।

शुभम ने 11 साल की उम्र में महाराष्ट्र के लिए उम्र वर्ग क्रिकेट खेलना शुरू किया और बाद में मुंबई का रुख किया। मुंबई में उन्होंने क्लब क्रिकेट खेलते हुए ऑलराउंडर के रूप में पहचान बनाई और 2016-17 में टीम के लिए डेब्यू किया। हालांकि मजबूत बल्लेबाजी क्रम के कारण उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिल पाए। कोविड के बाद वह गोवा गए, लेकिन वहां उन्हें वह स्तर और माहौल नहीं मिला जिसकी उन्हें तलाश थी।

अपने करियर को आगे बढ़ाने के इरादे से वह अमेरिका पहुंचे। शुरुआत में उन्होंने माता-पिता को यह नहीं बताया कि वह स्थायी रूप से जा रहे हैं। बाद में उन्हें बताया कि उन्हें बीसीसीआई से एनओसी और एमएलसी के लिए वीजा मिल गया है। यह फैसला परिवार के लिए भावनात्मक था, क्योंकि उन्होंने सरकारी नौकरी का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था।

इस पूरे सफर में उनकी पत्नी मौसमी ने उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने रांजणे से कहा कि वह अपने दिल की सुनें। साथ ही करीबी दोस्त सूर्यकुमार यादव ने भी उन्हें अपने फैसले पर भरोसा रखने की सलाह दी। आज शुभम रांजणे ह्यूस्टन में रहते हैं। एमएलसी में टेक्सस सुपर किंग्स के लिए खेलते हुए वह टीम के प्रमुख रन बनाने वालों में रहे और प्लेयर ऑफ द मैच भी बने। उन्होंने अपनी फिटनेस और ऑलराउंड खेल पर काफी मेहनत की है।

अब भारत के खिलाफ विश्व कप मैच से पहले रांजणे का सफर एक मुकाम पर पहुंचता दिख रहा है। उनके माता-पिता उनके संघर्ष और मेहनत पर गर्व महसूस करते हैं। शुभम के लिए यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि बचपन के सपने का साकार होना है।

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