Volleyball Federation of India Suspended: भारतीय खेल जगत के लिए यह एक बड़ी खबर है। अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल महासंघ (FIVB) ने वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (VFI) की मान्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब वीएफआई के अंतरिम नेतृत्व ने प्रशासनिक और कानूनी मानकों को पूरा करने में विफलता दिखाई।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के कुटलैहड़ से पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर को वीएफआई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन अब उन्हें और उनके नेतृत्व वाले अंतरिम निकाय को अपने पद से संबंधित सभी दावे तत्काल छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
FIVB द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, 20 मार्च 2026 को भारतीय संघ को आठ महीने के लिए सशर्त मान्यता दी गई थी। इन शर्तों में शामिल था कि वीएफआई का अंतरिम नेतृत्व FIVB, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के साथ पूर्ण सहयोग करेगा। साथ ही, उन्हें अपने संविधान को FIVB के नियमों के अनुरूप अपडेट करना था और राष्ट्रीय टीमों का चयन निष्पक्ष रूप से तकनीकी स्टाफ द्वारा कराना था। हालांकि, वीएफआई इन बुनियादी प्रशासनिक और सुशासन संबंधी शर्तों का पालन करने में विफल रहा।
जानकारी के मुताबिक इस निलंबन की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय कैंप में चल रहा विवाद भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। हाल ही में, भारत के वरिष्ठ वॉलीबॉल खिलाड़ियों ने कैंप में सुविधाओं के अभाव और चयन प्रक्रिया में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाई थी। खिलाड़ियों ने विदेशी कोच के अचानक हटाए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी। इन शिकायतों के बाद, FIVB बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन ने यह निर्णय लिया कि मौजूदा नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशासन चलाने में अक्षम है।
उल्लेखनीय है कि अब भारतीय वॉलीबॉल के संचालन की जिम्मेदारी एक ‘स्टीयरिंग कमेटी’ को सौंपी गई है। इस कमेटी में अंतरराष्ट्रीय महासंघ और भारतीय ओलंपिक संघ के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह कमेटी आगामी समय में खेल की गतिविधियों को सुचारू रूप से जारी रखेगी।
कमेटी का मुख्य कार्य राष्ट्रीय टीमों के चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, राज्य संघों के चुनाव आयोजित करना और वीएफआई के संविधान को अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप ढालना होगा। इस घटनाक्रम से कुटलैहड़ और हिमाचल प्रदेश के खेल गलियारों में हड़कंप मच गया है। पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर की अध्यक्षता में फेडरेशन का यह हश्र होना उनकी प्रशासनिक पकड़ पर सवाल खड़े करता है।
















