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“लड़दीयाँ फौजां और नाम सरदारों के”
सभी पार्टियों के कार्यकर्ता की दशा एक जैसी ही है| चुनाव लोकसभा....
आखिर इंसान क्यों ऐसी गलती कर बैठता है?
राजेश सारस्वत| क्या आपने कभी किसी जानवर को, किसी पक्षी को,किसी पशु....
हम उस दिन महिला दिवस मनायेंगे जब आप सब थोड़े से सुधर जाएंगे
हमें कोई International Women’s Day का मैसज न करे, क्योंकि दिवस हमेशा....
पैरों तले स्टूल खिसका और अरमान फंदे पे
कभी-कभी अरमान लटके रह जाते हैं फंदे पे और ज़िन्दगी का स्टूल....
पर वो मेरी दोस्त कभी थी नहीं
कभी -कभी अनजाने में लोग फेसबुक पर भी मिल जाते हैं अब....
अक्सर जवानों की शहादत के समय किये वादे क्यों भूल जाती है सरकार और नेता ?
प्रजासत्ता | बहुत दुःख होता है जब भी ऐसा कोई किस्सा सामने....
आख़िर खुद को मिले चंदे को उजागर क्यों नहीं करते राजनीतिक दल ?
प्रजासत्ता | राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर पहले प्रस्तुत....
अंतिम लेख : जब प्रथमिकता नहीं होती तो नज़रअंदाज़ होना लाजमी
अंतिम लेख : जब प्रथमिकता नहीं होती तो नज़रअंदाज़ होना लाजमी है,....
मैं खफा तो हूँ पर गिला नहीं…
तृप्ता भाटिया “मैं खफा तो हूँ पर गिला नहीं…” बहुत मुश्किल होता....
मन जब दुखी होता है तो अपने आप ही “आह” या बद्दुआ निकल जाती है
मन जब दुखी होता है तो अपने आप ही “आह” या बद्दुआ....














