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HP High Court: हिमाचल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 20 साल बाद मिला उसका हक, सरकार पर 50,000 का जुर्माना

Published on: 26 August 2025
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HP High Court News: हिमाचल में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर 20 साल बाद उसका हक मिला है। दरअसल, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 20 साल की सेवा के बाद नियमित करने का आदेश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने राज्य सरकार पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, क्योंकि उसने बार-बार कर्मचारी के दावे को ठुकराया, भले ही कोर्ट ने कई बार निर्देश दिए थे।

जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा, “कर्मचारी को बार-बार अपने हक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट के सिंगल जज और डिवीजन बेंच के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, राज्य सरकार ने आदेशों का पालन नहीं किया। इसलिए, यह सही मामला है जिसमें सरकार पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए।”

क्या है मामला?
उल्लेखनीय है कि बलवीर सिंह नाम के इस कर्मचारी को 2006 में नाहन के सरकारी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में दिहाड़ी मजदूर (चतुर्थ श्रेणी) के रूप में नियुक्त किया गया था। तब से वह लगातार चपरासी, दफ्तरी, चौकीदार और सफाईकर्मी के कर्तव्यों को निभा रहे हैं। 2014 में, हिमाचल प्रदेश सरकार की नीति के तहत, उन्होंने अपनी सेवा को नियमित करने की मांग की, क्योंकि उन्होंने आवश्यक सालों की सेवा पूरी कर ली थी।

लेकिन सरकार ने उनकी मांग को ठुकरा दिया। इसके बाद, बलवीर सिंह ने 2020 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार को उनके मामले पर विचार करने का निर्देश दिया। फिर भी, अधिकारियों ने उनकी मांग को खारिज कर दिया और कहा कि गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति बिना अनुमति के हुई थी, इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता।

बलवीर सिंह ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ फिर से हिमाचल कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह तर्क कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसके बाद सरकार ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन वह भी खारिज हो गई। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार बार-बार वही पुराना तर्क नहीं दोहरा सकती।

कोर्ट ने देखा कि सरकार यह तो कह रही है कि बलवीर सिंह की नियुक्ति नियमों के मुताबिक नहीं थी, लेकिन यह नहीं बता रही कि फिर भी वह 20 साल से नौकरी क्यों कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि जब इतने सालों तक सरकार ने उन्हें हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की, तो अब उनकी सेवा को नियमित करना होगा।

कोर्ट का अंतिम फैसला
मामले पर सुनवाईं के बाद हाईकोर्ट ने बलवीर सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए उनकी सेवा को नियमित करने का आदेश दिया। साथ ही, सरकार की लापरवाही के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

केस टाईटल : बलवीर सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य, केस संख्या :- CWP No. 3189 of 2025

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