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Shimla के चर्चित युग हत्याकांड में 11 साल बाद भी न्याय की आस लिए पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

Shimla के चर्चित युग हत्याकांड में 11 साल बाद भी न्याय की आस लिए पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

Shimla Yug Murder Case: राजधानी शिमला के बहुचर्चित युग हत्याकांड में मासूम के परिजनों ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें दो आरोपियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था और तीसरे आरोपी को बरी कर दिया गया था। मृतक बच्चे युग के पिता विनोद गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

गौरतलब है कि 23 सितंबर 2025 को हिमाचल हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में बदलाव करते हुए आरोपी तेजिंदर पाल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।

यह वही भयावह मामला है जिसमें 14 जून 2014 को शिमला के राम बाजार निवासी विनोद गुप्ता के चार साल के बेटे युग का अपहरण कर लिया गया था। आरोपियों ने बच्चे को रामचंद्र चौक के पास किराए के मकान में रखा, कई दिनों तक अमानवीय यातनाएं दीं और अंत में जिंदा बच्चे को भराड़ी स्थित नगर निगम के पानी के टैंक में फेंक दिया। 22 अगस्त 2016 को आरोपी विक्रांत बख्शी की निशानदेही पर सीआईडी ने टैंक से युग की हड्डियां बरामद की थीं। इसके बाद चंद्र शर्मा और तेजिंदर पाल को भी गिरफ्तार किया गया था।

5 सितंबर 2018 को शिमला की जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों – विक्रांत बख्शी, चंद्र शर्मा और तेजिंदर पाल – को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। डेथ रेफरेंस के लिए मामला हाईकोर्ट गया, जहां सजा में भारी बदलाव कर दिया गया।

युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा, “हाईकोर्ट ने जिस आरोपी की इस जघन्य हत्या में सबसे प्रमुख भूमिका थी, उसी तेजिंदर पाल को बरी कर दिया गया। मेरे बच्चे को कई दिनों तक तड़पाया गया, फिर जिंदा टैंक में फेंक दिया गया। हम इससे बिल्कुल सहमत नहीं हैं। इसलिए हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से ही न्याय की उम्मीद है। हमारी मांग है कि तीनों आरोपियों को फिर से फांसी की सजा दी जाए।”

उन्होंने आगे कहा, “सीआईडी ने इस केस में दिन-रात मेहनत की थी, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले से हम पूरी तरह असंतुष्ट हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हमारी SLP स्वीकार कर ली है, हालांकि अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।” बता दें कि 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस जघन्य अपराध के शिकार परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिल सका है और अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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