Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने SMC शिक्षकों के लिए चल रही विशेष भर्ती प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा है कि लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट (LDR) कोटे के तहत होने वाली किसी भी नियुक्ति को स्थायी नहीं माना जाएगा। यह पूरी तरह मामले के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी। साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि ऐसी हर नियुक्ति पत्र में यह शर्त स्पष्ट रूप से लिखी जाए, ताकि किसी को गलतफहमी न हो।
उल्लेखनीय है कि यह फैसला शिक्षा विभाग के उन 1427 पदों को भरने की प्रक्रिया से जुड़ा है, जिनके लिए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड 22 फरवरी 2026 को LDR टेस्ट आयोजित करने जा रहा है। इस टेस्ट में सिर्फ 2012 की SMC पॉलिसी के तहत नियुक्त उन शिक्षकों को मौका मिलेगा, जिन्होंने कम से कम 5 साल की सेवा पूरी कर ली है।
दरअसल, कुछ बेरोजगार शिक्षकों ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के बावजूद सरकार नियमित भर्ती की जगह यह विशेष टेस्ट करवा रही है, जो गलत है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना चाहिए और सभी शिक्षकों की भर्ती सीधे और नियमित तरीके से हो। अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो हजारों बेरोजगार युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा।
याद रहे, पहले हाईकोर्ट ने SMC शिक्षकों को हटाने के निर्देश दिए थे। इसके खिलाफ सरकार और शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। वहां सरकार ने वादा किया था कि आगे न तो अस्थायी शिक्षक भर्ती किए जाएंगे और न ही SMC शिक्षकों को नियमित किया जाएगा। इसी आश्वासन पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी थी।
अब न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को तय की है। कोर्ट का यह अंतरिम आदेश SMC शिक्षकों के लिए झटके जैसा है, क्योंकि उनकी नौकरी अब फैसले के अधर में लटक गई है। देखना यह है कि अंतिम फैसला क्या आता है । क्या हजारों शिक्षक स्थायी नौकरी पा सकेंगे या बेरोजगार युवाओं की मांग मान ली जाएगी? यह मामला पूरे प्रदेश के शिक्षक समुदाय के लिए अहम बन गया है।
















