साइड स्क्रोल मेनू
Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)

Himachal Politics: सीएम सुक्खू के खिलाफ फिर साजिश? राज्यसभा टिकट की लालसा ने खोला पुराना मोर्चा

Himachal Politics: सीएम सुक्खू के खिलाफ फिर साजिश? राज्यसभा टिकट की लालसा ने खोला पुराना मोर्चा
Preferred_source_publisher_button.width-500.format-webp

Himachal Politics: हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट शीघ्र ही रिक्त होने जा रही है, क्योंकि इंदु गोस्वामी का कार्यकाल पूरा हो रहा है। हिमाचल प्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है, तब से यह देखा जा रहा है कि जैसे ही राज्यसभा चुनाव नज़दीक आते हैं, वैसे ही राजनीतिक घमासान शुरू हो जाता है।

पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान मतदान के बाद विक्रमादित्य सिंह का सार्वजनिक रूप से भावुक होकर फूट-फूटकर रोना अभी भी लोगों को याद है। उस समय उन्होंने अपने पिता की प्रतिमा स्थापित करने का मुद्दा उठाया था। दरअसल, उन्हें यह आशंका थी कि सरकार गिर सकती है और यदि ऐसा हुआ तो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वे पीछे रह जाएंगे। शायद इसी कारण उन्होंने समय रहते अपना विरोध दर्ज करवाकर अलग पहचान बनाने की कोशिश की।

लेकिन घटनाक्रम ने वैसा मोड़ नहीं लिया, जैसा उन्होंने सोचा था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने न केवल सरकार बचाई, बल्कि संकट को पार कर सरकार को उपचुनावों तक सफलतापूर्वक ले गए। इसके बाद प्रतिभा सिंह से लेकर संगठन में कई बदलाव हुए और अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी विनय कुमार को सौंप दी गई।

इसे भी पढ़ें:  बेजुबां बच्चे के इलाज़ के पैसों से भजन गायक उमंग शर्मा ने समाजेसवा से प्रभावित होकर बड़का भाऊ को भेंट किया गाना

यदि प्रदेश अध्यक्ष के पद पर मुख्यमंत्री सुक्खू का कोई करीबी होता, तो संभव है कि विरोध का मोर्चा और अधिक खुलकर सामने आता, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सारी गतिविधियाँ राज्यसभा की लालसा का परिणाम हैं या इसके पीछे कोई और राजनीतिक रणनीति काम कर रही है। जो लोग हमेशा सत्ता के केंद्र में बने रहने के आदी रहे हों, यदि उनके पास विकल्प सीमित हो जाएँ, तो पीड़ा और बेचैनी स्वाभाविक है।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आज मुख्यमंत्री सुक्खू के विरुद्ध एक माहौल बनाने की कोशिश साफ़ तौर पर दिखाई दे रही है और इसका सीधा संबंध आगामी राज्यसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बार कौन किसके कंधे पर बंदूक रखकर चलाएगा और अंत में स्वयं पीछे हट जाएगा।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर राज्यसभा की एक सीट ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को हवा दे दी है। अब 2026 का राज्यसभा चुनाव नजदीक आते ही पुराने घाव फिर हरे हो रहे हैं। हाल के दिनों में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बाहरी राज्यों के नौकरशाहों पर दिए गए बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

इसे भी पढ़ें:  HPCET 2025 Exam Dates: जानें महत्वपूर्ण टिप्स और जानकारी..

विक्रमादित्य ने आरोप लगाया कि कुछ आईएएस-आईपीएस अधिकारी राज्य के हितों को नजरअंदाज कर रहे हैं। वह लगातार इस मामले पर अपनी ही सरकार को घेर रहे हैं। उनके इस बयान पर खुद सीएम सुक्खू और उनके खेमे के मंत्रियों ने तीखा पलटवार किया है।

सूत्रों की मानें तो इन सबके पीछे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के लिए राज्यसभा टिकट को लेकर दावेदारी का खेल चल रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि 2024 के संकट के बाद सुक्खू ने अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन विक्रमादित्य सिंह और प्रतिभा सिंह के खेमे में अभी भी नाराजगी बाकी है।

राज्यसभा चुनाव एक बार फिर सरकार और पार्टी के लिए बड़ी परीक्षा बन सकता है। देखना यह होगा कि इस बार कौन किसके कंधे पर बंदूक रखकर गोली चलाएगा और अंत में खुद पीछे हट जाएगा। हिमाचल की सियासत में अगले कुछ महीने बेहद दिलचस्प रहने वाले हैं।

Join WhatsApp

Join Now