Shimla News: शिमला की फास्ट ट्रैक (पोक्सो) अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने 15 साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न चुकाने पर छह महीने और जेल काटनी होगी।
वहीं, अदालत ने पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को 4 लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश भेजी है। यह मामला जिला शिमला के रोहड़ू क्षेत्र का है। आरोपी ने शादी का झांसा देकर नाबालिग को अपहरण कर कई दिनों तक बलात्कार किया था। फोरेंसिक सबूतों और पीड़िता की गवाही से दोष साबित हुआ
मामले की शुरुआत 17 अगस्त 2019 को हुई। आरोपी राजीव ब्रागटा ने नाबालिग को शादी का लालच देकर अपने ननिहाल ले गया। पीड़िता का भाई पहले सोचता रहा कि लड़की अपनी सहेली के घर गई होगी। लेकिन अगले दिन भी जब वह नहीं लौटी तो परिजनों को सूचना दी गई। परिवार ने खुद तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार 18 अगस्त की शाम को पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज हुई।
पुलिस ने तुरंत तलाश शुरू की और 22 अगस्त 2019 को आरोपी के ननिहाल से नाबालिग को बरामद कर लिया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्ची को परिवार को सौंप दिया गया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने 17 से 22 अगस्त तक कई बार उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए।
फोरेंसिक जांच में डीएनए और सीमन मैच होने से आरोपी के खिलाफ मजबूत सबूत मिले। स्कूल के एडमिशन रजिस्टर और पंचायत प्रमाणपत्र से लड़की की उम्र 15 साल साबित हुई। पुलिस ने जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश किया।
अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि अपहरण की धाराओं 363 और 366 में उसे बरी कर दिया गया।
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय थी। परिवार और स्वतंत्र गवाहों ने भी इसे पुष्ट किया। फोरेंसिक सबूतों ने मामले को और मजबूत बनाया। बचाव पक्ष के दावों को खारिज करते हुए अदालत ने साफ कहा कि भले आरोपी उस समय महज 19 साल का था और उसने शादी का इरादा होने का दावा किया, लेकिन नाबालिग से दी गई कोई भी सहमति कानूनी रूप से अमान्य होती है।

















