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USD to INR Record Low: कभी ₹3 में मिलता था $1, आज ₹94 के पार! क्या अब 100 का आंकड़ा छुएगा रुपया? जानें एक्सपर्ट्स की बड़ी चेतावनी

Indian Rupee vs US Dollar History: भारतीय रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच क्या रुपया 100 के पार जाएगा? विशेषज्ञों का विश्लेषण और रुपये की गिरावट के मुख्य कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
Published on: 22 March 2026
Rupee vs Dollar USD to INR Record Low: कभी ₹3 में मिलता था $1, आज ₹94 के पार! क्या अब 100 का आंकड़ा छुएगा रुपया? जानें एक्सपर्ट्स की बड़ी चेतावनी

USD to INR Record Low: भारतीय रुपये की हालत इन दिनों काफी नाजुक बनी हुई है। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालने, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और दुनिया भर में चल रहे युद्ध के तनाव ने रुपये को कमजोर कर दिया है। शुक्रवार को रुपये में 64 पैसे की बड़ी गिरावट देखी गई और यह डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 93.53 पर जाकर बंद हुआ। अब हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या रुपया आने वाले समय में 100 का आंकड़ा पार कर जाएगा?

बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल के दाम नीचे नहीं आते, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो रुपया बहुत जल्द 95 के स्तर तक गिर सकता है। एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि युद्ध की स्थिति और बिगड़ी, तो डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के पार भी जा सकता है।

आखिर रुपया इतना क्यों गिर रहा है?
दरअसल, रुपये की इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे मुख्य वजह विदेशी निवेशकों (FII/FPI) का भारतीय बाजार से पैसा निकालना है; अकेले मार्च महीने में ही उन्होंने 80,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है। इसके अलावा, ईरान-इजरायल विवाद की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 156 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है।

बता दें कि जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर को चुनते हैं, जिससे रुपये जैसी अन्य मुद्राओं की वैल्यू कम हो जाती है। वहीं, रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए फिलहाल सीमित कदम ही उठा रहा है।

शुक्रवार को जब बाजार खुला तो रुपया 92.92 पर था, लेकिन देखते ही देखते यह 93 का स्तर पार कर गया और अंत में 93.53 पर बंद हुआ। यह रुपये के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों का जाना और तेल की कीमतों का बढ़ना रुपये के लिए ‘दोहरी मार’ जैसा है। फिलहाल डॉलर इंडेक्स भी मजबूत होकर 99.60 के स्तर पर पहुंच गया है, जो रुपये के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

रुपये में गिरावट से शेयर बाजार का हाल
रुपये के साथ-साथ शेयर बाजार में भी हलचल रही। हालांकि शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट ही रही, लेकिन पूरे हफ्ते का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। जहां विदेशी निवेशकों ने भारी बिकवाली की, वहीं भारतीय घरेलू निवेशकों ने कुछ खरीदारी करके बाजार को संभालने की कोशिश की।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुरुवार को सेंसेक्स करीब 2,500 अंक टूट गया था, जो जून 2024 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट थी। न केवल भारत, बल्कि चीन, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल देखा गया।

यहां देखिए कैसे साल दर साल कैसे गिरा रुपया?

साल1 डॉलर = रुपये
19473.30
19667.50
199126.00
200851.00
201368.80
202484.00
202590.21
2026 ₹93.08
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