Himachal Fuel Cess: हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में अब पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर ‘अनाथ और विधवा सेस’ (उपकर) लगाया जाएगा। सोमवार को विधानसभा में भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बावजूद इससे जुड़े नए कानून को मंजूरी दे दी गई। सरकार का कहना है कि इस टैक्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल सीधे तौर पर राज्य के अनाथ बच्चों और गरीब विधवा महिलाओं की मदद के लिए किया जाएगा।
नियम के मुताबिक, यह सेस पेट्रोल-डीजल की पहली बिक्री के वक्त ही काट लिया जाएगा। सरकार ने इसकी अधिकतम सीमा 5 रुपये प्रति लीटर तय की है। इस नए संशोधन बिल के जरिए ‘ऑरफन एंड विडो सेस’ (अनाथ और विधवा उपकर) को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसके लिए कानून में एक नई धारा 6-ए भी जोड़ी गई है, ताकि इस सेस को पूरी तरह से कानूनी मान्यता मिल सके।
दूसरी तरफ, विपक्ष (भाजपा) ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। भाजपा विधायकों ने इसे जनता पर आर्थिक बोझ बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। उनका तर्क है कि इससे महंगाई बढ़ेगी। सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने इसे जनता विरोधी फैसला बताया।
उन्होंने कहा कि सेस लगने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेगी और हिमाचल प्रदेश में इसकी बिक्री कम होगी। बॉर्डर इलाकों में लोग दुसरे राज्यों में जाकर पेट्रोल-डीजल भरवाएंगे और इसक सीधा असर राज्य कि आर्थिकी पर पड़ेगा। भाजपा विधायकों ने कहा कि सेस लगाने से हिमाचल में डीजल और पेट्रोल महंगा होने से प्रदेश में बस किराया सहित सीमेंट की ढुलाई और खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे। इससे आम लोगों को पर महंगाई की मार पड़ेगी।
जबकि मुख्यमंत्री का मानना है कि विपक्ष समाज के कमजोर वर्गों की मदद करने के खिलाफ है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि इसे इस तरह लागू किया जाएगा कि आम जनता की जेब पर ज्यादा बोझ न पड़े। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस सेस के बाद भी राज्य में तेल की कीमतें पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा से ज्यादा नहीं होंगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में अपनी बात रखते हुए जयराम ठाकुर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर की बातें पंजाब की आम आदमी पार्टी जैसी लग रही हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य उन अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं की मदद करना है, जिन्होंने अपनों को खोया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डीजल और पेट्रोल पर लगाया गया सेस इन जरूरतमंदों के बेहतर जीवन और कल्याण के लिए है, न कि सरकार चलाने के लिए।
सुक्खू ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार खुद पेट्रोल-डीजल पर भारी सेस ले रही है, तो विपक्ष उस पर चुप क्यों है? उन्होंने भाजपा से पूछा कि वे हिमाचल के हितों के खिलाफ क्यों खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सेस लगने के बाद भी हिमाचल में तेल की कीमतें पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा से कम ही रहेंगी। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे राजनीति छोड़कर इस जनहितकारी बिल का समर्थन करें।















