Himachal Entry Tax Controversy: हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार द्वारा बाहरी राज्यों की गाड़ियों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। यह मामला अब सिर्फ टैक्स का नहीं रहा, बल्कि हिमाचल बनाम पंजाब सरकार बन गया है। हिमाचल प्रदेश ने जो नया एंट्री टैक्स लगाया है, उसे लेकर पंजाब और हिमाचल की सीमा पर काफी विरोध शुरू हो गया है।
कई सामाजिक संगठन इसके खिलाफ उतर आए हैं और अपना आंदोलन तेज कर रहे हैं। इन लोगों की मांग है कि पंजाब सरकार भी हिमाचल की गाड़ियों पर इसी तरह का टैक्स (रेसिप्रोकल टैक्स) लगाए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा है कि बॉर्डर के पास रहने वाले ग्रामीणों को इस टैक्स से पूरी तरह राहत मिलनी चाहिए ताकि उनके आने-जाने में कोई दिक्कत न हो।
इससे पहले इस विवाद को तब चिंगारी लगी जब पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने संकेत दिए कि अगर हिमाचल ने टैक्स नहीं घटाया, तो पंजाब भी बदले में वैसा ही टैक्स (Retaliatory Tax) लगा सकता है। वहीं इस पूरे मुद्दे पर हिमाचल के तीन बड़े मंत्रियों अनिरुद्ध सिंह, हर्षवर्धन चौहान और विक्रमादित्य सिंह ने अपनी बात रखी है।
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने साफ कहा कि सरकार का मकसद राज्य की कमाई (राजस्व) बढ़ाना है। उन्होंने तर्क दिया कि टैक्स में बढ़ोतरी बहुत मामूली है, जैसे कुछ गाड़ियों पर यह 130 रुपये से बढ़कर 170 रुपये हुआ है, यानी सिर्फ 40 रुपये का फर्क। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई गाड़ियों का टैक्स कम भी हुआ है, जिसे कोई देख नहीं रहा। पंजाब सरकार के कोर्ट जाने की धमकी पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि “उनकी मर्जी है, वे चाहें सुप्रीम कोर्ट जाएं या भगवान के पास।”
वहीं उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान का रुख थोड़ा नरम दिखा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस बारे में पंजाब के सीएम भगवंत मान से बात की है। एक्साइज विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है ताकि यह देखा जा सके कि किन लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है। खासकर छोटे वाहन मालिकों की नाराजगी दूर करने के लिए टैक्स के स्लैब पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
इसके अलावा लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि टैक्स लगाना राज्य सरकार का कानूनी अधिकार है, लेकिन हिमाचल, पंजाब के साथ कोई झगड़ा नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है ताकि दोनों राज्यों के लोगों को परेशानी न हो।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल सरकार ने 16 फरवरी को एंट्री टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया था, जिसे 1 अप्रैल से लागू होना था। जैसे ही इसकी खबर फैली, पंजाब के ट्रक और टैक्सी ऑपरेटरों ने विरोध शुरू कर दिया। पंजाब सरकार का कहना है कि यह फैसला पड़ोसी राज्यों के ट्रांसपोर्टरों पर बोझ डालेगा। जवाब में पंजाब अब कानूनी राय ले रहा है कि क्या वे भी हिमाचल की गाड़ियों पर इसी तरह का टैक्स लगा सकते हैं।
गौरतलब है कि पडोसी राज्पंय होने के चलते जाब और हिमाचल प्रदेश के बीच लोगों का काफी आना-जाना लगा रहता है, लेकिन अब हिमाचल सरकार द्वारा बढ़ाए गए एंट्री टैक्स ने विवाद खड़ा कर दिया है। इसके विरोध में पंजाब-हिमाचल बॉर्डर पर कई संगठनों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। इन संगठनों का कहना है कि पंजाब सरकार को भी इसके जवाब में ‘रेसिप्रोकल टैक्स’ (बराबरी का टैक्स) लगाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि बॉर्डर के पास रहने वाले गांवों के लोगों को इस टैक्स से पूरी तरह छूट दी जाए ताकि उनके रोज़मर्रा के कामों में कोई दिक्कत न आए।
हिमाचल में 1 अप्रैल 2026 से गाड़ियों की एंट्री पर लागू होगा नया टैक
दरअसल, हिमाचल प्रदेश ने 1 अप्रैल 2026 से बाहर के राज्यों की गाड़ियों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने की तैयारी कर ली है। नई दरों के लागू होते ही हिमाचल में एंट्री करना काफी महंगा हो जाएगा। उदाहरण के लिए, अब प्राइवेट कारों को 70 रुपये के बजाय सीधा 170 रुपये चुकाने होंगे। इसी तरह मिनी बसों के लिए 320 रुपये, बड़ी कमर्शियल बसों के लिए 600 रुपये और भारी ट्रकों या माल ढोने वाली गाड़ियों के लिए 900 रुपये का टैक्स तय किया गया है। टैक्स में हुई इस भारी बढ़ोतरी से न केवल आम लोग परेशान हैं, बल्कि ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोग भी इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।















