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Bahra University - Shimla Hills

पंजाई में मनाया खंड स्तरीय युवा उत्सव

Published on: 18 October 2021
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युवा सेवा एवं खेल विभाग मंडी के सौजन्य से विकास खंड बालीचौकी (सराज) के पंजाई स्कूल के प्रांगण में खंड स्तरीय युवा उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विकासखंड बाली चौकी के 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में 200 से अधिक दर्शक उपस्थित रहे। जिसमें लोक नृत्य लोकगीत व भाषण आदि पर प्रतिस्पर्धा करवाई गई। जिसमें विजेता प्रतिभागियों को प्रथम द्वितीय और तृतीय पुरस्कार से सम्मानित गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि श्री जितेंद्र निराला प्रधानाचार्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पंजाई रहे। मैं विशिष्ट अतिथि श्री अनिल चौहान अध्यापक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पंजाई रहे।

साथ हीअन्य अतिथि उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि महोदय व विशिष्ट अतिथि को वेज, टोपी और स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि महोदय द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात रंगारंग कार्यक्रमों का आगाज किया गया।

भाषण प्रतियोगिता में झांसी ठाकुर ने पहला स्थान हासिल किया द्वितीय स्थान पर दीपा कुमारी, तृतीय स्थान पर मीना कुमारी रही। लोकगीत में प्रथम स्थान दीपा सोनी ने प्राप्त किया, द्वितीय स्थान अर्जुन ठाकुर ने और तृतीय स्थान पर हंसराज रहे।

लोक नृत्य प्रतियोगिता में पहले स्थान पर सरस्वती महिला मंडल बछाहड रहा, द्वितीय स्थान पर महिला मंडल पाटीधार और तृतीय स्थान पर कल्पना चावला महिला मंडल महिनू व घटोत्कच युवा मंडल पंजाई रहा।

इस कार्यक्रम का आयोजन स्वयंसेवी प्यारे राम और पूर्व राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवी किशोरी लाल ने जलधर युवा मंडल कशल के सहयोग से इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न किया।

एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महोदय सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। साथ ही कहा की हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों को संजो कर रखना है ताकि आने वाली पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ सकें। यह संदेश हर घर तक पहुंचाने का आग्रह किया।

साथ ही पूर्व राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवी किशोरी लाल ने कहा कि अगर हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो हम कहते हैं कि रूस और मिस्र की सभ्यता पहले आई लेकिन मैं कहूंगा कि समूची धरा को जीवन कैसे जीना है यह हिंदुस्तान ने सिखाया आज ना रोम की सभ्यता है ना मिस्र की सभ्यता है लेकिन हिंदुस्तान आज भी अपनी संस्कृति और संस्कारों से पहचाना जाता है वहीं विदेशी आज हिंदुस्तान की संस्कृति को अपना रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य मेरे देश कायो है कि हमारी आने वाली पीढ़ी अपने देश की संस्कृति से पिछड़ रही है इसीलिए मैं इस क्षेत्र में कार्यरत रहता हूं ताकि हमारी युवा पीढ़ी हमारी संस्कृति से जुड़ी रहे।

इस कार्यक्रम के आयोजक स्वयंसेवी प्यारे राम ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि और प्रतिभागियों और इस कार्यक्रम में आए तमाम मेहमानों का धन्यवाद किया।

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