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Himachal News: हिमाचल में उपकर घोटाला – दूध और पर्यावरण के नाम पर वसूले 118 करोड़ रुपये अटके, इस रिपोर्ट में खुलासा

 Himachal Pradesh CAG Audit Report: हिमाचल प्रदेश में दूध, पर्यावरण और प्राकृतिक खेती के नाम पर जनता से वसूले गए करोड़ों रुपये के उपकर को सरकारी खजाने और संबंधित विभागों में जमा न करने पर लेखापरीक्षा प्रतिवेदन ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
Published on: 5 September 2026
Himachal News: हिमाचल में उपकर घोटाला - दूध और पर्यावरण के नाम पर वसूले 118 करोड़ रुपये अटके, इस रिपोर्ट में खुलासा

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादन, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आम जनता से वसूले गए उपकर (Cess) की राशि को सरकारी खजाने में समय पर जमा न किए जाने का गंभीर मामला उजागर हुआ है। राज्य के वित्त पर प्रस्तुत लेखापरीक्षा प्रतिवेदन 2024-25 में इस वित्तीय अनियमितता पर कड़े सवाल खड़े किए गए हैं।

राष्ट्रीय समाचार पत्र की वेबसाइट की एक खबर में ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 27.58 करोड़ रुपये का बिजली उपकर और 91.37 करोड़ रुपये का शराब उपकर उनके निर्धारित खातों में हस्तांतरित करने के बजाय रोक कर रखा गया। इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा विभिन्न ब्याज और जमा आरक्षित निधियों की 101.61 करोड़ रुपये की राशि पर 21.83 करोड़ रुपये का ब्याज भी देय पाया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने नवंबर 2024 से लागू दुग्ध और पर्यावरण उपकर के तहत वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 27.58 करोड़ रुपये की वसूली की थी। इस संग्रहित राशि में 12.65 करोड़ रुपये दुग्ध उपकर के रूप में और 14.93 करोड़ रुपये पर्यावरण उपकर के रूप में जनता से एकत्र किए गए थे। संवैधानिक और वित्तीय नियमों के अनुसार, जनता से जुटाई गई यह संपूर्ण राशि तुरंत राज्य की समेकित निधि (Consolidated Fund) में जमा की जानी चाहिए थी। हालांकि, बिजली बोर्ड ने इस राशि को समेकित निधि में भेजने के बजाय अपने ही चालू खाते में बनाए रखा।

इस मामले पर जब लेखापरीक्षा विभाग द्वारा जवाब मांगा गया, तो हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने अगस्त 2025 में अपना पक्ष रखा। बोर्ड ने तर्क दिया कि नकदी प्रवाह (Cash Flow) में भारी कमी के कारण राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में बोर्ड को दी जाने वाली देय राशि के एवज में इस उपकर की राशि को समायोजित (Adjust) कर दिया था। हालांकि, लेखापरीक्षा ने बोर्ड के इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए इसे स्पष्ट रूप से संवैधानिक प्रावधानों और तय वित्तीय नियमों के विपरीत और अनुचित करार दिया है।

दूसरी ओर, शराब पर वसूले गए उपकर के प्रबंधन में भी इसी तरह की बड़ी लापरवाही सामने आई है। राज्य के कराधान एवं आबकारी विभाग ने शराब की बिक्री और उसके निर्यात पर कुल 166.54 करोड़ रुपये का उपकर जुटाया था। इस कुल संग्रह में 141.92 करोड़ रुपये दुग्ध उपकर के रूप में तथा 24.62 करोड़ रुपये प्राकृतिक खेती उपकर के मद में एकत्र किए गए थे। इस भारी-भरकम वसूली के बावजूद, लक्षित पशुपालन विभाग को केवल 75.17 करोड़ रुपये ही हस्तांतरित किए जा सके।

लेखापरीक्षा रिपोर्ट के आंकड़े दर्शाते हैं कि मार्च 2025 तक कुल 91.37 करोड़ रुपये की बड़ी राशि नामित लाभार्थी विभागों तक पहुंच ही नहीं पाई। जनता से जिस विशिष्ट उद्देश्य के लिए कर वसूला गया था, वह राशि समय पर अपने सही मद में नहीं पहुंच सकी, जिससे विकास कार्यों और संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ना स्वाभाविक है। राज्य के खजाने में समय पर राशि जमा न होने और आरक्षित निधियों के उचित प्रबंधन के अभाव में 21.83 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ब्याज का दायित्व भी सामने आया है।

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