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Himachal News: पटवारी कानूनगो के निजी मोबाइल व इंटरनेट के सहारे हिमाचल का राजस्व विभाग

Himachal News: पटवारी कानूनगो के निजी मोबाइल व इंटरनेट के सहारे हिमाचल का राजस्व विभाग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पटवारी और कानूनगो अपनी जेब से मोबाइल फोन और इंटरनेट का खर्च उठाकर विभागीय कामकाज निपटाने को मजबूर हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट से लेकर आपदा प्रबंधन तक का सारा कार्य निजी संसाधनों के दम पर किया जा रहा है।

राजस्व कर्मचारियों को न सिर्फ इंटरनेट का खर्च खुद उठाना पड़ रहा है, बल्कि पटवारखानों की बिजली, पानी, स्टेशनरी और प्रिंटर जैसी जरूरतों का भार भी उनकी जेब पर ही पड़ रहा है।

हैरानी की बात है कि प्राकृतिक आपदाओं में क्षतिग्रस्त हुए पटवारखानों की मरम्मत के लिए कोई अलग फंड तक उपलब्ध नहीं है। पटवारी एवं कानूनगो महासंघ ने सरकार के इस रविये पर निराशा व्यक्त की है। महासंघ का कहना है कि राजस्व विभाग आपदा राहत के मोर्चे पर सबसे आगे रहता है, लेकिन इन कार्यों के लिए भी कर्मचारियों को खुद ही खर्च उठाना पड़ रहा है।

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कई बार तो कृषि, जल शक्ति, लोक निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों के काम भी इन्हें अपने मोबाइल से ही निपटाने पड़ते हैं, वह भी बिना किसी मानदेय के। पिछले कई महीनों से लगातार की जा रही अपीलों के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

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कागजों तक सीमित सरकार के वादे 

कुछ माह पहले पटवारी और कानूनगो अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। लेकिन करीब पांच महीने बाद भी उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि हर पटवारी को पूरे महीने का राजस्व काम केवल 25 रुपये के स्टेशनरी भत्ते से ही चलाना पड़ रहा है।

संघ के अनुसार यह अनदेखी न केवल कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा रही है बल्कि भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा दे रही है। पूर्व हड़ताल के समय सरकार ने शिमला से डीएलआर नोटिफिकेशन जारी कर हर पटवारखाने में इंटरनेट, कंप्यूटर और प्रिंटर उपलब्ध करवाने का वादा किया था। लेकिन आज तक यह सब कागजों में ही सिमट कर रह गया है।

महासंघ के के अनुसार इन  हालातों पर प्रदेशभर के राजस्व कर्मचारियों में सरकार की उदासीनता के प्रति गहरा रोष है। हिमाचल प्रदेश पटवार कानूनगो महासंघ ने एक बार फिर सरकार को पत्र भेजकर कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की है। ऐसे में अब हजारों राजस्व कर्मचारी इस उम्मीद में हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेगी और जल्द कोई ठोस समाधान निकालेगी।

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