Prajasatta Side Scroll Menu

PM Kusum Yojana Benefits: अब डीजल नहीं सूरज की रोशनी से होगी खेतों की सिंचाई, बंपर मुनाफा

Agriculture News India: भारत के लाखों किसान अब महंगे डीजल पंपों को छोड़कर सौर ऊर्जा को अपना रहे हैं। सरकारी योजना के जरिए सौर पंप लगाने से सिंचाई का खर्च कम हुआ है और अतिरिक्त बिजली बेचकर किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो रहा है।
PM Kusum Yojana benefits: अब डीजल नहीं सूरज की रोशनी से होगी खेतों की सिंचाई, बंपर मुनाफा

PM Kusum Yojana Benefits: भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में हर सुबह सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाना एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन चुका है। डीजल की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत को इतना बढ़ा दिया है कि छोटे किसानों का मुनाफा सिमटता जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा-पंजाब जैसे राज्यों में एक छोटा किसान हर महीने डीजल पर औसतन 8,000 से 20,000 रुपये खर्च करने को मजबूर है। यह खर्च न केवल किसान की बचत को खत्म करता है, बल्कि उन्हें आर्थिक तंगी की ओर धकेलता है।

देश में वर्तमान में करीब 90 लाख डीजल पंप संचालित हैं, जो न केवल महंगे हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ी समस्या बने हुए हैं। इन पंपों से निकलने वाला धुआं बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाता है। डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने खेती को कम मुनाफे वाला व्यवसाय बना दिया है, जिससे किसान वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहे थे।

इसे भी पढ़ें:  Shri Krishna Janmabhoomi Case: अब मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में सर्वे को मंजूरी,

इस विकट स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने 2019 में ‘पीएम-कुसुम योजना’ (PM KUSUM Yojana) की शुरुआत की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को डीजल की निर्भरता से मुक्त कर सौर ऊर्जा की ओर ले जाना है। योजना के अंतर्गत तीन प्रमुख प्रावधान किए गए हैं: बंजर भूमि पर सोलर प्लांट लगाना, डीजल पंपों को हटाकर सोलर पंप स्थापित करना और ग्रिड से जुड़े पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ना।

इस योजना के तहत सौर पंप लगाने से किसानों को प्रति वर्ष लगभग 60,000 रुपये तक की बचत हो रही है। कई मामलों में, सोलर सिस्टम की पूरी लागत एक वर्ष के भीतर ही वसूल हो जाती है। विशेष रूप से हरियाणा राज्य इस दिशा में एक मिसाल बनकर उभरा है। वहां किसानों को सब्सिडी का लाभ इस तरह दिया जा रहा है कि उन्हें कुल लागत का मात्र 25% ही चुकाना पड़ता है, शेष राशि का वहन सरकार करती है।

इसे भी पढ़ें:  Politics News: सीएम सुक्खू ने ‘एजेंडा आज तक-2023’ में गिनाई अपनी उपलब्धियां

सिंचाई के साथ-साथ किसान अब ‘ऊर्जा निर्माता’ की भूमिका में भी आ रहे हैं। यदि सोलर सिस्टम से अतिरिक्त बिजली उत्पन्न होती है, तो किसान उसे बिजली ग्रिड को बेचकर अपनी आय का एक नया स्रोत भी विकसित कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे न केवल मुफ्त बिजली मिल रही है, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त कमाई भी सुनिश्चित हो रही है।

तकनीकी नवाचार के रूप में ‘एग्रीवोल्टाइक्स’ (Agrivoltaics) तकनीक भी लोकप्रिय हो रही है। इस विधि में खेतों के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और नीचे फसलों की बुआई की जाती है। इससे भूमि का दोहरा उपयोग होता है। पैनलों की छाया से मिट्टी में नमी बरकरार रहती है और फसलों को अत्यधिक धूप से सुरक्षा भी मिलती है।

इसे भी पढ़ें:  उदयनिधि के बाद अब ए.राजा के बयान पर बवाल, सनातन धर्म की एड्स और कुष्ठ रोग से की तुलना

सरकार अब इस योजना में और भी तकनीकी सुधार कर रही है। आने वाले समय में सोलर सिस्टम के साथ बैटरी स्टोरेज को जोड़ने की तैयारी है, ताकि दिन में उत्पन्न बिजली का उपयोग रात में भी किया जा सके। हालांकि, जानकारी के अभाव और प्रारंभिक पूंजी की चुनौती जैसे कुछ अवरोध जरूर हैं, लेकिन सौर ऊर्जा का यह बदलाव भारतीय कृषि परिदृश्य के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है।

Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
Agriculture News Government Policy India breaking news today Latest India headlines National news India

Join WhatsApp

Join Now