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OpenAI CEO Sam Altman: AGI से खत्म होगी नौकरियां? नींद छोड़कर काम में जुटे ऑल्टमैन

ओपनएआई प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने एजीआई (AGI) के भविष्य को लेकर एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है, साथ ही अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव करते हुए ‘पॉलीफेसिक स्लीप’ अपनाने का ऐलान किया है।
OpenAI CEO Sam Altman: AGI से खत्म होगी नौकरियां? नींद छोड़कर काम में जुटे ऑल्टमैन

OpenAI CEO Sam Altman: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अग्रणी नाम, ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एक बार फिर सनसनीखेज बयान दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ऑल्टमैन ने भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं साझा की हैं। उनका कहना है कि ‘पोस्ट-एजीआई’ (Post-AGI) दुनिया में काम करने की पारंपरिक व्यवस्था खत्म हो जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था के ढहने की आशंका है।

एजीआई यानी ‘आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस’ एआई का वह उन्नत रूप है, जो मानव के समान या उससे बेहतर तरीके से तर्क करने, सीखने और योजना बनाने में सक्षम होगा। ऑल्टमैन का यह बयान तकनीकी जगत में बहस का विषय बन गया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि एजीआई के आने के बाद कोई काम नहीं करेगा और आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है।

इस विरोधाभासी बयान के साथ ही ऑल्टमैन ने अपने निजी जीवन में एक अजीबोगरीब बदलाव की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वे अब ‘पॉलीफेसिक स्लीप’ (polyphasic sleep) का पालन करेंगे। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति 24 घंटे के दौरान कई बार छोटी-छोटी नींद लेता है।

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सैम ऑल्टमैन ने अपने इस फैसले के पीछे का तर्क भी दिया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए ‘GPT-5.5’ मॉडल (कोडक्स में) की क्षमता इतनी प्रभावशाली है कि वे काम छोड़कर लंबी नींद लेना अफोर्ड नहीं कर सकते। उन्हें डर है कि कहीं वे सोते रहें और इस दौरान महत्वपूर्ण तकनीकी विकास से चूक न जाएं।

ऑल्टमैन की इन दोनों बातों में एक बड़ा विरोधाभास नजर आता है। एक तरफ वे एजीआई को लेकर दुनिया को यह डर दिखा रहे हैं कि यह तकनीक इंसानी कामकाज को खत्म कर देगी, वहीं दूसरी तरफ वे खुद उसी तकनीक के प्रति इतने समर्पित हो गए हैं कि अपनी नींद तक त्यागने को तैयार हैं। यह स्थिति एआई उद्योग की उस विडंबना को दर्शाती है, जहां तकनीक बनाने वाले ही उसके प्रभाव को लेकर असमंजस में हैं।

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एजीआई के आगमन के समय को लेकर भी उद्योग में अलग-अलग राय है। ऑल्टमैन ने पहले अनुमान लगाया था कि 2030 तक एजीआई दुनिया में आ जाएगा। हालांकि, कई तकनीकी विशेषज्ञ इस दावे से सहमत नहीं हैं। मोल्टबोट (Moltbot) के निर्माता पीटर स्टीनबर्गर ने ‘जनरलाइज्ड इंटेलिजेंस’ के बजाय ‘स्पेशलाइज्ड इंटेलिजेंस’ पर जोर देने की बात कही है।

एंथ्रोपिक (Anthropic) की अध्यक्ष डेनिएला अमोदेई एजीआई की अवधारणा को ही ‘पुराना’ मानती हैं। वहीं, गूगल डीपमाइंड के सीईओ का मानना है कि ‘वर्ल्ड मॉडल्स’ के बिना एजीआई को हासिल करना संभव नहीं है।

इन चर्चाओं के बीच, ओपनएआई ने अपना नया मॉडल ‘GPT-5.5’ लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल तर्क करने, कोडिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगा। नया मॉडल अपने पूर्ववर्ती GPT-5.4 की तुलना में न केवल तेज और सुरक्षित है, बल्कि अधिक कुशल भी है।

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तकनीकी मानकों की बात करें तो, OpenAI ने दावा किया है कि GPT-5.5 ने ‘Terminal-Bench 2.0’ पर 82.7% सटीकता हासिल की है, जो कि एंथ्रोपिक के क्लाउड ओपस 4.7 और गूगल के जेमिनी 3.1 प्रो से अधिक है। यह मॉडल जटिल और मल्टी-स्टेप कार्यों को बेहतर तरीके से प्लान और सेल्फ-करेक्ट करने में सक्षम है।

GPT-5.5 की एक बड़ी विशेषता इसकी दक्षता है। यह कम टोकन का उपयोग करके काम पूरा करता है, जिससे यह डेवलपर्स और बड़ी कंपनियों के लिए लागत के लिहाज से सस्ता विकल्प बन गया है। भले ही सैम ऑल्टमैन एजीआई से आर्थिक गिरावट की चेतावनी दे रहे हों, लेकिन उनकी कंपनी लगातार अपनी तकनीकी क्षमताओं को विस्तार देने में जुटी है।

Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
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