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Election Results: क्या वोटर लिस्ट में हुई हेरफेर? Arvind Kejriwal का बड़ा दावा

Arvind Kejriwal on Election Results: पश्चिम बंगाल और असम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद अरविंद केजरीवाल ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए बड़ा संकट बताया है।
Election Results: क्या वोटर लिस्ट में हुई हेरफेर? Arvind Kejriwal का बड़ा दावा

Election Results: पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर सीधा निशाना साधा है। उनका दावा है कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और चुनावों को केवल मतदान के जरिए ही नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट में हेरफेर करके भी प्रभावित किया जा रहा है।

केजरीवाल ने यह टिप्पणी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के पंजाब विधायकों को संबोधित करते हुए की। उन्होंने भाजपा पर ‘लोकतंत्र का अपहरण और हत्या’ करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान पश्चिम बंगाल में जो राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं, ठीक उसी तरह का रुझान बिहार और महाराष्ट्र में भी देखने को मिला है। केजरीवाल ने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया को अपने पक्ष में करने के लिए वोटर लिस्ट में सुनियोजित तरीके से बदलाव किए जा रहे हैं।

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अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए, उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया। केजरीवाल ने बताया कि उनके जेल जाने से पहले इस क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 1,48,000 थी। जब वे वापस लौटे, तो यह संख्या घटकर केवल 1,06,000 रह गई। उनके अनुसार, महज छह महीने के भीतर 42,000 वोट काट दिए गए। उन्होंने कहा कि जिस विधानसभा क्षेत्र से वे पिछली बार 30,000 मतों से जीते थे, वहां से इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटने के कारण वे 3,000 मतों से पीछे रह गए।

केजरीवाल ने कहा कि जब बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएं, तो किसी भी निष्पक्ष उम्मीदवार के लिए चुनाव जीतना अत्यंत कठिन हो जाता है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया। उनके अनुसार, यह स्थिति दिखाती है कि किस तरह से आम मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।

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दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों की बात करें, तो इस बार राज्य में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इससे पहले 2021 के चुनावों में पार्टी केवल 77 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थिति में भारी गिरावट आई है और पार्टी 212 सीटों से फिसलकर सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई है। इस परिणाम को राज्य की राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

असम में भी एनडीए (NDA) गठबंधन ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। भाजपा ने अपने दम पर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया है और इसके सहयोगी दलों ने भी राज्य में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसके विपरीत, कांग्रेस पार्टी केवल 15 सीटों पर सिमट कर रह गई है। कांग्रेस के लिए यह हार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जोरहाट सीट पर उनके बड़े नेता गौरव गोगोई को भी हार का सामना करना पड़ा है।

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इस घटनाक्रम के बाद वोटर लिस्ट का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक तरफ विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा हमला बता रहा है, वहीं भाजपा का कहना है कि यह एक पारदर्शी और साफ-सुथरी प्रक्रिया का हिस्सा है। पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का विवाद पहले भी चर्चा में रहा है और केजरीवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल फिर से गरमा गया है।

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