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Morepen Laboratories NGT Notice: कसौली की इस बड़ी कंपनी पर लगे गंभीर आरोप, NGT ने जारी किया नोटिस,

NGT notice to Morepen Labs: एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित मोरेपन लैबोरेटरी लिमिटेड के खिलाफ ध्वनि प्रदूषण और औद्योगिक अपशिष्ट मानकों के उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
By PNT
Published on: 3 June 2026
Morepen Laboratories NGT Notice: कसौली की इस बड़ी कंपनी पर लगे गंभीर आरोप, NGT का नोटिस,

Morepen Laboratories NGT Notice: राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कसौली क्षेत्र में संचालित एक प्रमुख औषधि निर्माण इकाई के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने इस इकाई के विरुद्ध दायर एक मूल आवेदन पर सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) तथा माननीय डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ द्वारा की गई।

दरअसल, यह पूरा मामला लेख सिंह नामक आवेदक द्वारा मैसर्स मोरेपन लैबोरेटरी लिमिटेड एवं अन्य के विरुद्ध दायर किया गया है। आवेदन में कंपनी पर कई गंभीर पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। आवेदक का मुख्य आरोप है कि इस औषधि निर्माण इकाई द्वारा जेनरेटर सेटों एवं औद्योगिक मशीनरी के संचालन से निर्धारित सीमा से काफी अधिक ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न किया जा रहा है, जिससे स्थानीय पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस दावे की पुष्टि के लिए एक ध्वनि निगरानी रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।

ध्वनि प्रदूषण के अलावा, कंपनी पर औद्योगिक कचरे के अनुचित प्रबंधन का भी आरोप लगा है। आवेदन के अनुसार, इस इकाई द्वारा निर्धारित सरकारी मानकों से कहीं अधिक मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट का उत्सर्जन किया जा रहा है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर सिंचाई के लिए आरक्षित जल का अनधिकृत रूप से औद्योगिक उपयोग करने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। इन गतिविधियों से पूरे क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो इस विवाद को लेकर पहले भी कानूनी कदम उठाए जा चुके हैं। आवेदक ने एनजीटी को सूचित किया कि इसी विषय में पूर्व में सिविल जज, कसौली (सोलन) की अदालत के समक्ष सिविल वाद संख्या 64/2023 दायर किया गया था। हालांकि, उस समय कोर्ट ने इस वाद को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इस विशिष्ट विषय में उचित कानूनी उपाय और क्षेत्राधिकार राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के पास ही उपलब्ध है।

सिविल कोर्ट के निर्देश के बाद ही इस मामले को एनजीटी के समक्ष लाया गया। प्राधिकरण ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 1 (मोरेपन लैबोरेटरी) की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत का नोटिस स्वीकार कर लिया है। एनजीटी ने कंपनी को अपने पक्ष में जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

इसके साथ ही, एनजीटी की पीठ ने आवेदक लेख सिंह को भी आवश्यक प्रक्रियात्मक निर्देश दिए हैं। आदेश के मुताबिक, आवेदक को अन्य सभी संबंधित प्रतिवादियों को आवेदन एवं संलग्न दस्तावेजों की प्रतियां जल्द से जल्द उपलब्ध करानी होंगी। इसके अतिरिक्त, आवेदक को अगली सुनवाई की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पूर्व अदालत में सेवा शपथपत्र (सर्विस एफिडेविट) भी दाखिल करना अनिवार्य होगा।

पर्यावरणीय नियमों और औद्योगिक जवाबदेही से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले की अगली रूपरेखा तय हो चुकी है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने मामले की विस्तृत समीक्षा और दोनों पक्षों के दावों को देखने के बाद अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। आगामी सुनवाई में कंपनी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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