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Trump New Tariffs: भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैक्स लगाने की तैयारी में अमेरिका, जानिए इस नए प्रस्ताव के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

India US Trade Relations Impact: अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों के खिलाफ जबरन मजदूरी के उत्पादों को न रोकने का आरोप लगाते हुए भारी टैक्स लगाने का नया प्रस्ताव जारी किया है, जिससे भारतीय निर्यातकों में हड़कंप मच गया है।
Published on: 6 June 2026
Trump New Tariffs: भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैक्स लगाने की तैयारी में अमेरिका, जानिए इस नए प्रस्ताव के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

Trump New Tariffs: भारत और अमेरिका के बीच एक तरफ जहां महत्वपूर्ण व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ वाशिंगटन से आई एक खबर ने भारतीय बाजार और निर्यातकों की चिंता को अचानक बढ़ा दिया है। दरअसल ,अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित दुनिया के 60 देशों के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा व्यापारिक कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है।

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन चिन्हित देशों ने जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से तैयार होने वाली वस्तुओं के आयात पर अपने यहां प्रभावी और पर्याप्त प्रतिबंध लागू नहीं किए हैं। इसी गंभीर आरोप को आधार बनाते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत से आने वाले सामानों पर 12.5 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) लगाने का विचार किया है।

इस नए प्रस्ताव के सामने आने के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर इसके व्यापक और दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका जताई जाने लगी है। रणनीतिक स्तर पर चल रही ट्रेड डील के बीच अमेरिका के इस कदम को भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

आखिर क्या है अमेरिकी जांच का पूरा मामला?
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के तहत आने वाले ‘सेक्शन 301’ से जुड़ी हुई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सेक्शन 301 के अंतर्गत दुनिया की कुल 60 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों की व्यापक समीक्षा की थी। इस जांच के बाद USTR ने निष्कर्ष निकाला कि कई देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार, उद्योग और स्थानीय श्रमिकों के हितों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रही हैं, क्योंकि वे जबरन मजदूरी से बने सस्ते उत्पादों को रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अमेरिका ने सभी 60 देशों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव के तहत कुछ देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही गई है, जबकि भारत सहित शेष बचे देशों को 12.5 फीसदी की उच्चतम अतिरिक्त शुल्क श्रेणी में रखा गया है।

भारत को निशाना बनाने के पीछे अमेरिका का दावा
USTR की आधिकारिक रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि भारत उन देशों की सूची में शामिल है, जिसने जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों की वैश्विक आवाजाही को रोकने के लिए अपनी सीमाओं पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। अमेरिकी एजेंसी का दावा है कि इस लापरवाही के कारण अमेरिकी कंपनियों और वहां के स्थानीय श्रमिकों को बाजार में भारी प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा स्वीकार करते हुए कहा गया है कि कुछ विशेष क्षेत्रों में इस प्रकार के उत्पादों की आवाजाही को लेकर अमेरिकी प्रशासन बेहद चिंतित है।

किन-किन देशों पर गिरेगी इस फैसले की गाज?
अमेरिका की इस बड़ी व्यापारिक कार्रवाई की जद में केवल भारत ही अकेला देश नहीं है, बल्कि दुनिया की कई दिग्गज अर्थव्यवस्थाएं इसमें शामिल हैं। इस सूची में भारत के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के नाम मुख्य रूप से शामिल हैं।

इसके साथ ही, अमेरिका ने अपने कुछ अन्य करीबी सहयोगियों जैसे कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), मैक्सिको, ब्रिटेन और ताइवान के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है, हालांकि इन देशों पर 10 फीसदी की दर से ही अतिरिक्त टैरिफ लगाने की सिफारिश की गई है।

क्या तुरंत प्रभावी हो जाएगा यह नया शुल्क?
भारतीय निर्यातकों और व्यापारिक घरानों के लिए राहत की बात यह है कि USTR का यह कदम फिलहाल केवल एक कानूनी प्रस्ताव है और इसे तुरंत लागू नहीं किया जा रहा है। अमेरिकी नियमानुसार, इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।

संबंधित देश या कंपनियां आगामी 6 जुलाई तक अपने सुझाव और विरोध दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद 7 जुलाई को एक सार्वजनिक सुनवाई का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में भारत से होने वाले निर्यात पर कोई भी नया शुल्क लागू नहीं हुआ है।

भारत सरकार का रुख और निर्यातकों पर संभावित असर
इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिया है कि वह अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि चूंकि प्रस्तावित शुल्क अभी केवल विचाराधीन स्तर पर हैं, इसलिए भारत इस मुद्दे को द्विपक्षीय व्यापार वार्ता से पूरी तरह अलग रखकर हल करने की कोशिश करेगा ताकि मुख्य व्यापार समझौते पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

उल्लेखनीय है कि यदि भविष्य में यह 12.5 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह लागू हो जाता है, तो अमेरिका को निर्यात होने वाले कई भारतीय उत्पाद वहां के बाजारों में काफी महंगे हो जाएंगे। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सीधे तौर पर प्रभावित होगी, विशेषकर वस्त्र (टेक्सटाइल), विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और भारी श्रम पर आधारित भारतीय उद्योगों पर दबाव काफी बढ़ जाएगा। हालांकि, USTR ने यह भी संकेत दिए हैं कि अंतिम फैसले में ऊर्जा, दवाइयों, दुर्लभ खनिजों और कुछ विशिष्ट कृषि उत्पादों को इस अतिरिक्त टैक्स के दायरे से पूरी तरह छूट दी जा सकती है।

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