Scotch Whiskey Price: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का असर अब उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत स्कॉटलैंड से भारत आने वाली स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में चरणबद्ध तरीके से कटौती की जाएगी। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस नीतिगत बदलाव के कारण भारतीय बाजार में आयातित स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में 5% से लेकर 10% तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
इस व्यापार समझौते के तहत, इम्पोर्टेड व्हिस्की और जिन पर लगने वाले भारी-भरकम टैरिफ को शुरू में 150% से घटाकर 75% किया जाएगा। इसके बाद के चरणों में इसे और कम करते हुए 40% के स्तर पर लाया जाएगा। हालांकि, उद्योग जगत से जुड़े जानकारों का कहना है कि ग्राहकों को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि रिटेल कीमतें ठीक उसी अनुपात में कम होंगी, जितनी प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की गई है।

भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में से एक है। इसके बावजूद, आयातित शराब पर ऊंचे आयात शुल्क के कारण विदेशी ब्रांड्स की कीमतें घरेलू बाजार में काफी अधिक बनी रहती हैं। भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाली मौजूदा 150% आयात शुल्क दर को धीरे-धीरे कम किया जाएगा। इससे ब्रिटेन से आने वाले प्रीमियम ब्रांड्स भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते हो जाएंगे।
जानकारों का मानना है कि शुरुआती चरण में स्कॉच व्हिस्की की रिटेल कीमतों में 5% से 10% तक की कमी आ सकती है। हालांकि वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आयातक कंपनियां और राज्य सरकारें अपने कर ढांचे में किस प्रकार का बदलाव करती हैं। उद्योग जगत का कहना है कि कीमतों में कमी आने से देश में प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम श्रेणी की स्कॉच व्हिस्की की मांग में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
जॉन डिस्टिलरीज के चेयरमैन पॉल पी जॉन का कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी अंतिम रिटेल कीमत का सिर्फ एक हिस्सा होती है। इसके अलावा दूसरे खर्च, जैसे कि राज्य की एक्साइज़ ड्यूटी, वैट (VAT), डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर का मार्जिन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और मार्केटिंग, उस कुल कीमत का बहुत बड़ा हिस्सा होते हैं जो आखिर में एक ग्राहक चुकाता है। नतीजतन, कम टैरिफ के फायदे धीरे-धीरे मिलेंगे और अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होंगे।
वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि उपभोक्ता किस राज्य में रहता है और किस तरह की स्कॉच खरीदता है। पॉल जॉन के अनुसार, ग्राहकों को शुरुआत में लगभग 5-10% का रिटेल फायदा मिल सकता है, जो प्रति बोतल कुछ सौ रुपये हो सकती है। महाराष्ट्र जैसे ज्यादा टैक्स वाले राज्यों में कस्टम ड्यूटी फाइनल रिटेल कीमत का सिर्फ 10-15% होती है। इससे कम टैरिफ का असर सीमित हो जाता है और वहां कीमतों में लगभग 5% की कमी दिख सकती है, बशर्ते इम्पोर्टर इसका फायदा आगे बढ़ाएं।
इसके विपरीत, हरियाणा जैसे कम टैक्स वाले राज्यों में स्कॉच व्हिस्की की कीमतें 15% तक कम हो सकती हैं। हालांकि, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां शराब के डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी कॉर्पोरेशन का पूरा कंट्रोल है, हो सकता है कि कीमतों में कमी का फायदा तुरंत आम ग्राहकों तक न पहुंचे। इन राज्यों में सरकारी अधिकारी ड्यूटी से हुई पूरी बचत को खुद अपने पास राजस्व के रूप में रख सकते हैं।
इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत सबसे ज्यादा फायदा उन स्कॉच व्हिस्की ब्रांड्स को मिलेगा जो स्कॉटलैंड में पूरी तरह तैयार होकर सीधे भारत आयात की जाती हैं। इन्हें तकनीकी भाषा में मूल स्थान पर बोतलबंद स्कॉच व्हिस्की (Bottled-in-Origin Scotch Whisky) कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बल्क में आयात कर बोतलबंद की जाने वाली स्कॉच की तुलना में सीधे आयात होने वाली व्हिस्की पर शुल्क कटौती का असर ज्यादा दिखाई देगा, जिससे नए ब्रांड्स की एंट्री भी होगी।
कीमतों के गणित को समझें तो जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल एज्ड 12 इयर्स ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की और शिवाज रीगल 12 ईयर ओल्ड ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की की 750 ml की बोतल की कीमत अभी ₹3,888 है। समझौते के बाद 5–10% की कटौती होने पर इनकी कीमतें गिरकर ₹3,499 से ₹3,694 तक आ सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय उपभोक्ताओं को प्रति बोतल ₹194 से लेकर ₹389 तक की सीधी बचत होने का अनुमान है।


















