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Himachal Congress Crisis: पूर्व CPS नीरज भारती को पिता चंद्र कुमार की बड़ी नसीहत, बोले- “अपनी ही सरकार पर ‘अटैची’ के आरोप लगाना गलत”

Congress Politics Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने अपने पुत्र और पूर्व सीपीएस नीरज भारती द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें पार्टी अनुशासन में रहने की सख्त हिदायत दी है।
Published on: 6 June 2026
Himachal Congress Crisis: पूर्व CPS नीरज भारती को पिता चंद्र कुमार की बड़ी नसीहत, बोले- "अपनी ही सरकार पर 'अटैची' के आरोप लगाना गलत"

Himachal Congress Crisis: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्य संसदीय सचिव एवं कांग्रेस नेता नीरज भारती द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए सरकार व पार्टी विरोधी बयान के बाद राज्य में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब उनके पिता और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्र कुमार का बड़ा बयान सामने आया है।

शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि नीरज ने जो बयानबाजी की है, उससे समाज और राजनीति में अच्छा संदेश नहीं गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में कोई भी काम छोटा नहीं होता और छोटी-मोटी बातें चलती रहती हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी की सरकार पर इस तरह के आरोप लगाना बिल्कुल भी सही नहीं है।

कैबिनेट मंत्री ने बेटे द्वारा लगाए गए आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि नीरज ने अपने बयान में जो ‘अटैची’ की बात कही है, वह उसे पूरी तरह से अस्वीकार करते हैं। उनके अनुसार, “दो अटैची यहां रखेंगे और तीन वहां भेजेंगे” जैसे लांछन लगाना कोई अच्छा संदेश नहीं देता। यह सीधे तौर पर अपनी ही सरकार के ऊपर हमला है, जिसे किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बेटे को नसीहत देते हुए याद दिलाया कि वह खुद दो बार विधायक रहे हैं और वीरभद्र सिंह की सरकार में मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। उस वक्त भी कई बार वह छोटी-मोटी बातों को लेकर मीडिया के माध्यम से तत्कालीन मुख्यमंत्री पर अपने विचारों की भड़ास निकालते थे। चंद्र कुमार ने कहा कि इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी चीजें तभी तक अच्छी लगती हैं, जब तक हमारी अपनी सोच सकारात्मक हो। इस प्रकार की बयानबाजी से किसी का राजनीतिक कद नहीं बढ़ता, बल्कि नुकसान ज्यादा होता है।

उन्होंने नीरज भारती को बिना सोचे-समझे इस प्रकार के विवाद न खड़े करने की राय दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे बयानों से संगठन और सरकार की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगता है। कोई भी दल सिर्फ और सिर्फ अनुशासन से चलता है और यही जीवन में सबसे जरूरी है। अगर उन्हें सरकार से कोई शिकायत या तालमेल की समस्या थी, तो वह बैठकर चर्चा कर सकते थे।

चंद्र कुमार ने कहा कि नीरज एक महत्वपूर्ण पद पर पार्टी उपाध्यक्ष के रूप में तैनात थे। इस्तीफा देने से पहले उन्हें सोच-विचार करना चाहिए था और मुख्यमंत्री तथा पार्टी अध्यक्ष से मिलकर इस विषय पर बात करनी चाहिए थी। इस तरह सरेआम आरोप लगाने का कोई फायदा नहीं है। चुने हुए पदाधिकारियों को ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं, क्योंकि इससे पार्टी की छवि खराब होती है और सरकार पर बेवजह का दबाव बनता है।

मंत्री ने खुलासा किया कि तीन दिन पहले तक नीरज उनके साथ ही थे, लेकिन उन्होंने कभी भी इस प्रकार की मंशा या राय जाहिर नहीं की। सोशल मीडिया पर बैठे-बिठाए कुछ भी लिख देना अच्छी बात नहीं है। उन्हें जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय संवाद करना चाहिए था। अब चूंकि पार्टी ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है, फिर भी संगठन उनके साथ बैठकर चर्चा करेगा। अक्सर नौजवान आवेश और गुस्से में आकर ऐसी बातें कह देते हैं, लेकिन आगे उनका पूरा राजनीतिक करियर होता है।

जब कैबिनेट मंत्री से पूछा गया कि एक पिता के नाते वह अपने बेटे को क्या नसीहत देंगे, तो उन्होंने व्यावहारिक अंदाज में कहा, “जब बाप का जूता बेटे के पैर में आ जाता है, तो उसकी लाइन थोड़ी अलग हो जाती है और उसकी सोच भी काफी बदल जाती है।” नीरज की कार्यशैली को सभी जानते हैं और वह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ भी रहे हैं।

राजनीति में कार्यों की आलोचनात्मक समीक्षा होती है, जहां लोग काम को सराहते भी हैं और कमियां भी निकालते हैं। परंतु इस प्रकार की बयानबाजी से इंसान अपनी छवि तो खराब करता ही है, साथ ही सरकार पर भी आंच आती है। उन्होंने अंत में कहा कि वह खुद इस विषय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से बात करेंगे ताकि नीरज के दिल में अगर कोई बात है, तो उसे सुना जा सके।

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