Himachal Congress Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लिए जाने के विरोध में मंगलवार को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। इस कार्रवाई के विरोध में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिमला स्थित राजभवन के बाहर एक बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया।
इस प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं पार्टी के शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठे। राजभवन के बाहर बहुत बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्रित हुए और उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों तथा पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले युवाओं और छात्रों पर बल का प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ है।

धरने के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इस पूरी कार्रवाई को छात्रों तथा देश की आम जनता की आवाज दबाने का एक सीधा प्रयास करार दिया। पार्टी नेताओं ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
राजभवन के बाहर स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पार्टी देशवासियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी इस लड़ाई और विरोध को आगे भी पूरी मुस्तैदी से जारी रखेगी।
इस बीच, दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लिए जाने की घटना पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला है। प्रेस को जारी एक आधिकारिक बयान में कुलदीप राठौर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार दमन कर रही है और देश के युवाओं की जायज आवाज को पुलिसिया ताकत के बल पर दबाने की कोशिश की जा रही है।
कुलदीप राठौर ने देश में परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देशभर में लगातार सामने आ रहे प्रश्नपत्र लीक के मामलों से करोड़ों छात्रों का भविष्य गहराते संकट में आ गया है। छात्र एक पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली तथा न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय उन पर बर्बरता से लाठीचार्ज करवा रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार किसी भी तरह से लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं हो सकता, बल्कि यह विशुद्ध तानाशाही का परिचायक है।
राठौर ने आगे कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा न्याय मांग रहे छात्रों के समर्थन में पूरी तरह शांतिपूर्वक प्रदर्शन में शामिल हुए थे, लेकिन उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। इस कदम से केंद्र सरकार की लोकतंत्र विरोधी सोच खुलकर पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता और विपक्ष के बुनियादी सवालों का जवाब देने से लगातार बच रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पुलिस बल का सहारा ले रही है।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को सही ढंग से संभालने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। प्रश्नपत्र लीक होने की सिलसिलेवार घटनाओं ने देश के युवाओं का भरोसा तोड़कर रख दिया है। इसके बावजूद सरकार मुख्य दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय जायज विरोध करने वाले छात्रों और नेताओं को निशाना बना रही है।
कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह छात्रों की सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के तमाम मामलों की पूरी निष्पक्षता से जांच कराई जानी चाहिए और इस व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं का भरोसा बहाल हो सके।


















