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‘चाबियां वापस करो…’ HRTC की हड़ताल पर भड़के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, दी बड़ी चेतावनी

हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल पर डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया है कि बस सेवाएं बाधित करने वालों पर एस्मा के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
HRTC Employees Strike Mukesh Agnihotri press conference Shimla,: 'चाबियां वापस करो...' HRTC की हड़ताल पर भड़के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, दी बड़ी चेतावनी

HRTC Employees Strike: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों द्वारा प्रस्तावित हड़ताल और चक्का जाम को लेकर राज्य सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बुधवार को शिमला में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के सम्मान और उनके साथ संवाद बनाए रखने में पूरा विश्वास रखती है, लेकिन आम जनता को परेशानी में डालकर बस सेवाओं को बाधित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है, तब से एचआरटीसी कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार इस मामले में एक महीने की भी डिफॉल्टर नहीं रही है। इसके साथ ही निगम के कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता (DA) प्रदान किया जा रहा है और उन्हें पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ भी दिया जा रहा है। ऐसे में हड़ताल का फैसला पूरी तरह तर्कहीन है।

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मुकेश अग्निहोत्री ने जोर देकर कहा कि एचआरटीसी का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य जनसेवा है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में प्रतिवर्ष लाखों लोग निगम की बसों में सफर करते हैं और यह उनकी लाइफलाइन है। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी राजनीतिक एजेंडे या अन्य कारणों के चलते इन आवश्यक बस सेवाओं को बाधित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने प्रस्तावित चक्का जाम को पूरी तरह से गैरकानूनी और अवैध करार दिया है।

परिवहन मंत्री ने एलान किया कि प्रदेश में इस समय एस्मा (Essential Services Maintenance Act ) लागू है। यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो सरकार एस्मा के कड़े प्रावधानों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार इस विवाद का समाधान बातचीत के जरिए ही निकालना चाहती है और इसके लिए सरकार के वार्ता के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं।

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कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि यदि चालक और परिचालक बसें नहीं चलाना चाहते हैं, तो वे अपनी बसों की चाबियां प्रबंधन को वापस सौंप दें। उन्होंने साफ किया कि किसी भी कर्मचारी को कानून अपने हाथ में लेने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या निर्दोष यात्रियों को बीच रास्ते में उतारने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं दी जाएगी। इस व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए गुरुवार से सभी चालकों और परिचालकों को उनके रूट से संबंधित लिखित आदेश जारी किए जाएंगे।

निगम को मजबूत करने के सरकारी प्रयासों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने एचआरटीसी के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 813 नई बसें खरीदी हैं, जिनमें 279 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इसके अलावा 2,198 कर्मचारियों को अनुबंध से नियमित किया गया है और 327 परिचालकों की नियमित भर्ती की गई है। साथ ही 198 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी ओपीएस के दायरे में लाया गया है।

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मुकेश अग्निहोत्री ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि एसीएस (अतिरिक्त मुख्य सचिव) के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों की ओर से कोई भी वित्तीय मांग नहीं रखी गई थी, बल्कि उनकी चर्चा का मुख्य विषय केवल तबादले  थे। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन लगभग ढाई करोड़ रुपये की आय अर्जित करने वाले इस निगम को हड़ताल से जो भी आर्थिक नुकसान होगा, उसकी पूरी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एचआरटीसी चालक-परिचालक यूनियन का यह मामला अब उच्च न्यायालय पहुंच चुका है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई प्रस्तावित है।

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