Kullu Rave Party Case: कुल्लू में आयोजित रेव पार्टी के मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया आदेश के बाद राज्य की सुक्खू सरकार अब इस फैसले के खिलाफ कानूनी कदम उठाने जा रही है। एक मीडियारिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता अनूप रत्न ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष एक संशोधन आवेदन दायर करेगी और अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
दरअसल, इस मामले में सरकार का मानना है कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि जिला प्रशासन और पुलिस ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती है।महाधिवक्ता अनूप रत्न ने मामले की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि माननीय हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था।

इसके बाद अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव से रेव पार्टी के आयोजन स्थल का मौके पर निरीक्षण करवाया था। डीएलएसए सचिव द्वारा सौंपी गई उसी निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने कुल्लू के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और संबंधित उपमंडल अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर वहां से स्थानांतरित करने के निर्देश जारी किए हैं। अब सरकार इसी आदेश पर पुनर्विचार के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
महाधिवक्ता के अनुसार, उच्च न्यायालय के आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद सरकार को यह महसूस हुआ कि कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक तथ्य अदालत के समक्ष सही समय पर नहीं रखे जा सके। इस कानूनी विषय पर उन्होंने कुल्लू के डीसी और एसपी से भी गहन चर्चा की है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस विशिष्ट आयोजन को नियमानुसार केवल साउंड सिस्टम बजाने की अनुमति दी गई थी। इसके साथ ही, आयोजकों के पास आबकारी नियमों की धारा 12-ए के तहत कार्यक्रम में शराब परोसने का एक वैध और कानूनी लाइसेंस भी उपलब्ध था।
हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन इस तरह के आयोजनों में मादक पदार्थों के संभावित इस्तेमाल को लेकर पूरी तरह सतर्क था। पुलिस ने शुरुआत से ही कार्यक्रम में ड्रग्स या अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका जताई थी और इस महत्वपूर्ण बिंदु को औपचारिक रूप से अपनी प्रशासनिक रिपोर्ट में भी बाकायदा दर्ज किया था।
महाधिवक्ता ने साफ किया कि केवल डीसी, एसपी और एसडीएम का तबादला कर देना इस पूरी समस्या का वास्तविक समाधान नहीं है, क्योंकि प्रशासन ने अपनी तय प्रक्रिया का पालन किया था। सरकारी पक्ष को मजबूती से रखते हुए अनूप रत्न ने आगे बताया कि आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स के जवान पूरी तरह मुस्तैद थे। सुरक्षा और खुफिया तंत्र को सक्रिय रखते हुए इन जवानों को सादे कपड़ों में मौके पर निगरानी के लिए तैनात किया गया था।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कुल्लू क्षेत्र में इस तरह के व्यावसायिक और निजी आयोजन पिछले 10 से 12 वर्षों से लगातार होते आ रहे हैं। जिला प्रशासन ने पूर्व के वर्षों की तरह ही इस बार भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आयोजन की अनुमति दी थी। हिमाचल प्रदेश सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए महाधिवक्ता ने कहा कि ऐसे आयोजनों पर पूरी तरह से पूर्ण प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय इन आयोजनों के सुचारू संचालन के लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया और कड़ा नियमन तैयार किया जाना चाहिए। एक निश्चित एसओपी बनने से निजी सुरक्षा व्यवस्था, शराब परोसने के नियम, मादक पदार्थों की प्रभावी रोकथाम और प्रशासनिक निगरानी जैसे संवेदनशील पहलुओं को भविष्य में कानूनी रूप से बेहद प्रभावी ढंग से नियंत्रित और प्रबंधित किया जा सकेगा।
महाधिवक्ता ने दोहराया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की नशे के खिलाफ पूरी तरह से ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। राज्य में विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक व्यापक और सख्त अभियान लगातार चलाया जा रहा है। यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी पाई जाती है, तो सरकार निश्चित रूप से उस पर गंभीरता से विचार करेगी। फिलहाल, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर उच्च न्यायालय के समक्ष सभी कानूनी पहलुओं को प्रस्तुत किया जाएगा और आदेश में संशोधन का अनुरोध किया जाएगा।
















