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PMGKAY Rice Quality: सरकारी राशन में अब नहीं मिलेगा टूटा चावल, पीएम मोदी की कैबिनेट ने लिया यह ऐतिहासिक फैसला

Government Ration Scheme: केंद्र सरकार ने देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिलने वाले मुफ्त चावल की गुणवत्ता में सुधार करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत टूटे दानों की मात्रा में भारी कटौती की गई है।
Published on: 2 July 2026
PMGKAY Rice Quality: सरकारी राशन में अब नहीं मिलेगा टूटा चावल, पीएम मोदी की कैबिनेट ने लिया यह ऐतिहासिक फैसला

PMGKAY Rice Quality: केंद्र सरकार ने देश के 80 करोड़ से अधिक राशन कार्ड धारकों को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। अब सरकारी राशन की दुकानों पर मिलने वाले चावल की क्वालिटी पहले से कहीं ज्यादा बेहतर होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार को फैसला किया कि सरकारी राशन में दिए जाने वाले चावल में ‘टूटे हुए चावल’ की मात्रा को भारी कटौती के साथ आधा से भी कम कर दिया गया है।

सरकार के इस कदम से देश के गरीब परिवारों को बेहतर गुणवत्ता का अनाज पूरी गरिमा और सम्मान के साथ मिल सकेगा। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस फैसले के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब तीन दशकों में पहली बार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत बांटे जाने वाले चावल के क्वालिटी स्टैंडर्ड को सुधारा गया है।

जोशी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत आम जनता तक पहुंचने वाले सरकारी अनाज की गुणवत्ता को उत्कृष्ट बनाना है ताकि लाभार्थियों को बेहतर पोषण और सही उत्पाद मिल सके। बता दें कि सरकार ने कच्चे और उबले, दोनों तरह के चावलों में टूटे दाने की सीमा को कड़ाई से तय कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पहले के नियमों के मुताबिक कच्चे चावल में 25 फीसदी तक टूटा हुआ चावल मिलाने की छूट दी गई थी, जिसे अब बड़े स्तर पर घटाकर सिर्फ 10 फीसदी तय कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ, परबॉयल्ड राइस में टूटे चावल की अधिकतम सीमा को 16 फीसदी से घटाकर सीधे 5 फीसदी के स्तर पर ला दिया गया है। इस कटौती से राशन में मिलने वाले साबुत चावल की मात्रा काफी बढ़ जाएगी।

इस बड़े बदलाव के बाद आम जनता और उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस छंटनी के बाद जो टूटा हुआ चावल बचेगा, उसका इस्तेमाल कहां किया जाएगा। पीटीआई रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार किसानों से खरीदे गए अनाज के एक-एक दाने का सही और उचित इस्तेमाल सुनिश्चित करेगी। राशन की दुकानों के लिए छांटे गए बेहतर क्वालिटी के चावल को गरीबों में वितरित किया जाएगा। वहीं, छंटनी के दौरान निकले अतिरिक्त टूटे हुए चावल का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने (बायोफ्यूल) और पशुओं के चारे के रूप में किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया है कि इस नए बदलाव से राशन की कुल मात्रा या लाभार्थियों के हक पर किसी भी तरह का कोई असर नहीं पड़ेगा। देश के हर पात्र परिवार को पहले की तरह ही पूरा अनाज पूरी तरह मुफ्त मिलता रहेगा, बस अब उनके पास पहुंचने वाले अनाज की क्वालिटी पहले के मुकाबले काफी बेहतर होगी। इस पूरी वितरण व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार तकनीकी तौर पर क्यूआर-कोड आधारित ट्रैकिंग (QR-based traceability) का इस्तेमाल भी सुनिश्चित करने जा रही है।

बता दें कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सरकार वर्तमान में हर लाभार्थी को प्रति माह 5 किलो अनाज (गेहूं और चावल) मुफ्त प्रदान करती है। वहीं, अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के दायरे में आने वाले सबसे गरीब परिवारों को हर महीने प्रति परिवार कुल 35 किलो अनाज दिया जाता है। इस पूरी व्यवस्था को संचालित करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) देश के किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज की खरीद करता है और फिर इसे सरकारी राशन प्रणालियों के माध्यम से जनता तक पहुंचाता है।

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