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VB-GRAM-G Scheme: मनरेगा की जगह आई ‘VB-GRAM-G’ योजना में दिव्यांग, बुजुर्ग और महिलाओं के लिए अब लागू होगी अलग वेतन प्रणाली

VB-GRAM-G Yojna: केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह नई ग्रामीण रोजगार योजना VB-GRAM-G लागू कर दी है, जिसके तहत अब महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों को उनकी कार्य क्षमता के आधार पर अलग वेतन ढांचा मिलेगा।
VB-GRAM-G Scheme: मनरेगा की जगह आई 'VB-GRAM-G' योजना में दिव्यांग, बुजुर्ग और महिलाओं के लिए अब लागू होगी अलग वेतन प्रणाली

VB-GRAM-G Scheme: देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में करीब दो दशक बाद एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, अर्थात मनरेगा को पूरी तरह से बदल दिया है। अब मनरेगा के स्थान पर पूरे देश में एक नई ग्रामीण रोजगार योजना को आधिकारिक तौर पर मंजूरी देते हुए जमीन पर उतार दिया गया है।

इस नई व्यवस्था और योजना का नाम विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण यानी ‘VB-GRAM-G’ रखा गया है। केंद्र सरकार द्वारा तैयार की गई यह महत्वाकांक्षी योजना 1 जुलाई 2026 से संपूर्ण देश में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है।

इस नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के अंतर्गत सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए कई बड़े और संरचनात्मक बदलाव किए हैं। योजना की सबसे बड़ी और मुख्य विशेषता यह है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले सभी श्रमिकों को एक समान पैमाने से नहीं आंका जाएगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

इस नई प्रणाली के तहत केंद्र सरकार ने दिव्यांगजन, बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित श्रमिकों के लिए एक बिल्कुल अलग वेतन ढांचा तैयार किया है। इस नए ढांचे को ‘कार्य क्षमता आधारित मजदूरी व्यवस्था’ का नाम दिया गया है। इसके लागू होने से अब शारीरिक रूप से कमजोर श्रमिकों, बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को उनकी कार्य क्षमता और उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य की वास्तविक प्रकृति के अनुसार ही मजदूरी का भुगतान सीधे किया जाएगा।

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अब तक की पुरानी रोजगार व्यवस्था में कई ऐसे मामले सामने आते थे जहां समान कार्य मानकों के लागू होने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर या दिव्यांग श्रमिकों को पूरा भुगतान प्राप्त करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता था। वे कठिन शारीरिक श्रम वाले मानकों को पूरा नहीं कर पाते थे, जिससे उनकी मजदूरी कट जाती थी। नई व्यवस्था का मुख्य मकसद ग्रामीण रोजगार में मौजूद इसी ऐतिहासिक असमानता को पूरी तरह से समाप्त करना और कम करना है।

इस बड़े वेतन सुधार के अलावा सरकार ने रोजगार के दिनों में भी बड़ी बढ़ोतरी की है। इस नई ग्रामीण योजना के तहत अब रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर सीधे 125 दिन कर दिया गया है। यानी अब ग्रामीण मजदूरों को साल में अधिक दिनों का सुनिश्चित रोजगार प्राप्त हो सकेगा। रोजगार के दिनों में की गई इस वृद्धि और अलग वेतन प्रणाली को आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ ग्रामीण भारत की रोजगार व्यवस्था में एक अत्यंत महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव मान रहे हैं।

केंद्र सरकार के अनुसार, इस नई विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण (VB-GRAM-G) योजना का उद्देश्य केवल ग्रामीण नागरिकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना मात्र नहीं है। इसके व्यापक लक्ष्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण करना, पूरी प्रक्रिया की तकनीक आधारित निगरानी सुनिश्चित करना और ग्रामीण आय सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाना भी शामिल है। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में पूरी तरह लागू हो चुका है।

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दिव्यांगों पर फोकस
नई VB-GRAM-G योजना के तहत दिव्यांगजनों (PwDs) को रोजगार से जोड़ने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार का मानना है कि मौजूदा उत्पादकता मानक (Productivity Benchmarks) कई बार कमजोर वर्गों को रोजगार योजनाओं में पूरी तरह भागीदारी से वंचित कर देते हैं। ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने कहा कि योजना में दिव्यांगजनों के लिए विशेष रोजगार अवसर, प्राथमिकता वाले आजीविका परिसंपत्ति निर्माण और उनकी क्षमता के अनुरूप अलग मजदूरी ढांचा तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन्हें सम्मानजनक रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और योजनाओं में सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना है।

दिव्यांगजनों के लिए खास दैनिक मजदूरी अभी तय की जानी है। दरों की प्रस्तावित सूची में पूरी तय दैनिक मज़दूरी के भुगतान की गारंटी है, जो अभी अलग-अलग राज्यों में ₹241 से ₹400 के बीच है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को पूरी दैनिक मज़दूरी पाने के लिए तय घंटों तक काम करने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही, उन्हें ज़्यादा मेहनत वाले कामों के बजाय सुपरवाइज़री, सपोर्ट और आजीविका से जुड़े कामों की ओर लगाया जाएगा।

दिव्यांगों को मिलेगा अलग कार्ड
दिव्यांग मजदूरों की पहचान करने, उनके अधिकारों को ट्रैक करने और उन्हें उपयुक्त काम देने में मदद के लिए खास ‘ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड’ भी जारी किए जाएंगे। इन जॉब कार्ड का रंग दूसरे मज़दूरों को जारी किए जाने वाले कार्ड से अलग होगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से ग्रामीणों की आय में इजाफा होगा। मजदूरी भुगतान में सुधार होगा। ग्रामीण मांग मजबूत होगी। गांवों से पलायन कम हो सकता है। इसके साथ ही महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ सकती है। हालांकि योजना की सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन और राज्यों के सहयोग पर निर्भर करेगी।

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मजदूरी में भी बड़ा बदलाव
नई योजना लागू होने के साथ केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए संशोधित मजदूरी दरें अधिसूचित कर दी हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब ग्रामीण रोजगार कार्यों में दैनिक मजदूरी ₹300 से कम नहीं होगी। यह बदलाव लाखों ग्रामीण श्रमिकों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मनरेगा के बाद यह ग्रामीण रोजगार क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। पहली बार सरकार ने यह स्वीकार किया है कि सभी श्रमिकों की कार्य क्षमता समान नहीं होती। ऐसे में समान मजदूरी मानक हमेशा न्यायसंगत नहीं होते। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो ग्रामीण रोजगार व्यवस्था अधिक समावेशी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बन सकती है। वहीं करोड़ों ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त रोजगार और आय सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उन वर्गों को मिलने की उम्मीद है जो अब तक समान कार्य मानकों के कारण नुकसान में रहते थे। सरकार का लक्ष्य है कि कार्यों की डिजिटल निगरानी होगी। भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी। फर्जी जॉब कार्ड और घोटालों पर रोक लगेगी। बता दें कि VB-GRAM-G को टेक्नोलॉजी आधारित ग्रामीण रोजगार मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

सरकार कितना खर्च करेगी?
केंद्र सरकार ने VB-GRAM-G के लिए करीब ₹96,000 करोड़ के बजट प्रावधान का अनुमान रखा है। यह राशि ग्रामीण रोजगार, मजदूरी भुगतान और ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण पर खर्च की जाएगी। इसे पिछले दो दशकों में ग्रामीण रोजगार ढांचे का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है।

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