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Punjab Congress Crisis: पूर्व सीएम चन्नी के कड़े तेवरों के बाद भूपेश बघेल की बैठक अचानक टली

Punjab News: पंजाब कांग्रेस में छिड़े अंदरूनी घमासान के बीच पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की महत्वपूर्ण बैठक फिलहाल टल गई है।
Published on: 10 July 2026
Punjab Congress Crisis: पूर्व सीएम चन्नी के कड़े तेवरों के बाद भूपेश बघेल की बैठक अचानक टली

Punjab Congress Crisis: पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के दो सबसे बड़े चेहरों प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच चल रही गुटबाजी अब सीधे बगावत के मोड़ पर पहुंच चुकी है।

इस राजनीतिक संकट के बीच, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अब इस रणनीतिक बैठक के शनिवार सुबह 11 बजे आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हाल ही में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद हुई। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले से पार्टी का एक धड़ा नाराज चल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कुछ अन्य वरिष्ठ नेता इसी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अपनी गहरी चिंताओं और आपत्तियों से पार्टी आलाकमान को अवगत कराने के लिए विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे थे।

चन्नी की इस नाराजगी और दिल्ली दौरे को पंजाब की राजनीति में एक बड़ी बगावत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। हालांकि, इस अंदरूनी कलह को दबाने और जनता के बीच एकजुटता का संदेश देने के लिए गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एक साझा बैठक की।

इस बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह, भारत भूषण आशु, गुरकीरत सिंह कोटली और बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा समेत कई दिग्गज नेता एक साथ नजर आए। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना था कि शीर्ष नेतृत्व भले ही अलग-अलग विचारों में बंटा हो, लेकिन संगठन के स्तर पर सभी एकजुट हैं।

बैठक समाप्त होने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि नेताओं के विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस पूरी तरह से एकजुट है। इसी सुर में सुर मिलाते हुए परगट सिंह ने भी कहा कि नेताओं की राय अलग-अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन जब पार्टी के हितों की बात आती है, तो कांग्रेस हमेशा एक साथ खड़ी दिखाई देती है। नेताओं के इस रुख से साफ है कि वे पार्टी के भीतर के इस बड़े तनाव को सार्वजनिक रूप से तूल नहीं देना चाहते हैं।

दूसरी तरफ, कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने इस आंतरिक बैठक को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि इस बैठक से पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल बढ़ा है और इसमें भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई है। राणा गुरजीत सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र के खिलाफ उठाए जाने वाले किसी भी कदम पर चुप नहीं बैठेगी।

यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जाएगी, तो कांग्रेस पूरी मजबूती से अपनी आवाज बुलंद करेगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मौजूदा राजनीतिक हालात से निपटने के लिए अदालत का रुख करने या फिर राज्य स्तर पर बड़ा जनआंदोलन आयोजित करने के विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार किया गया है।

इस पूरे विवाद पर पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल का बयान भी सामने आया है। बघेल ने पहले स्पष्ट किया था कि चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के पार्टी की अहम बैठक में शामिल नहीं होने के बाद, वह इन दोनों वरिष्ठ नेताओं से अलग से मुलाकात कर बातचीत करेंगे। बघेल ने पार्टी के अनुशासन का हवाला देते हुए साफ कहा कि आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले अंतिम होते हैं और उन्हें बार-बार बदला नहीं जा सकता।

उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले का खुलकर समर्थन किया और राज्य इकाई में किसी भी तरह के बड़े मतभेद की खबरों को खारिज करने का प्रयास किया।

इस भारी राजनीतिक खींचतान के बीच, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज कर दी हैं। वडिंग ने एक बयान में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पार्टी से बिल्कुल भी नाराज नहीं हैं। उन्होंने चन्नी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि चन्नी कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं और वे पार्टी के हित के लिए किसी भी तरह का बड़ा त्याग करने को हमेशा तैयार रहते हैं।

यह पूरा नाटकीय घटनाक्रम और नेताओं के बीच की यह तल्खी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मानी जा रही है। चुनाव से ठीक पहले शीर्ष नेताओं की यह आपसी गुटबाजी और बैठकों का टलना राज्य में कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। अब शनिवार सुबह होने वाली भूपेश बघेल और चन्नी की बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जिससे पंजाब कांग्रेस का भविष्य तय होगा।

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