Kangra POCSO Court Verdict: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट (अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश) विजय लक्ष्मी की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला महिला थाना धर्मशाला में 9 अप्रैल 2025 को दर्ज की गई एक प्राथमिकी (FIR) से जुड़ा है। पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया था कि रिश्ते में चाचा लगने वाला यह व्यक्ति लंबे समय से उसे डरा-धमका रहा था। आरोपी उसकी इच्छा के विरुद्ध लगातार उसके साथ शारीरिक संबंध बना रहा था।

जान से मारने की धमकी देकर रखा चुप, बच्चे के जन्म के बाद खुला राज
शातिर आरोपी ने पीड़िता को इस घिनौनी हरकत की जानकारी किसी को भी देने पर उसे और उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। लोकलाज और परिवार की जान को खतरे में देख पीड़िता लंबे समय तक इस खौफ के साए में चुप रही। लेकिन जब पीड़िता गर्भवती हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया, तब जाकर इस खौफनाक वारदात का खुलासा हुआ।
इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 एवं 351(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत किया था।
अदालत में 25 गवाहों ने दर्ज कराए बयान
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में नायब कोर्ट यशपाल ने सहायक के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई।
सरकारी वकील ने आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए अदालत के समक्ष 25 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करवाए। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, वैज्ञानिक प्रमाणों (डीएनए व अन्य मेडिकल रिपोर्ट) और गवाहों के बयानों का गहन अवलोकन करने के बाद आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत मुख्य रूप से दोषी पाया और उसे 20 साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई।


















