US Tariff on India: अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के वैश्विक कारोबार पर लगाम कसने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। इसके तहत भारत सहित दुनिया के 17 देशों से आयात होने वाले चुनिंदा सामानों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का आधिकारिक फैसला लिया गया है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा घोषित यह नया शुल्क शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।
शुरुआती दौर में अमेरिका ने भारत के खिलाफ 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की योजना तैयार की थी। हालांकि, भारत द्वारा हाल ही में अपनी विदेश व्यापार नीति में किए गए रणनीतिक बदलावों और सुधारों को संज्ञान में लेते हुए अमेरिका ने रुख नरम किया और प्रस्तावित शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत करने का निर्णय लिया।

भारत को इस तरह मिली शुल्क में राहत
अमेरिकी प्रशासन ने पिछले महीने व्यापार अधिनियम (Trade Act) की धारा 301 के तहत कई देशों पर नए शुल्क लगाने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें भारत का नाम भी शामिल था। उस दौरान भारतीय निर्यात पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की सिफारिश की गई थी।
भारत सरकार ने स्थिति को देखते हुए 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया और बंधुआ मजदूरी से तैयार किसी भी प्रकार की वस्तु के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। अमेरिकी प्रशासन ने भारत के इस विधायी कदम को सकारात्मक माना। इसके परिणामस्वरूप भारत पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित शुल्क को 12.5 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संदर्भ में जारी एक ज्ञापन में स्पष्ट किया कि जिन देशों ने बंधुआ मजदूरी पर रोक लगाने के लिए ठोस नीतियां लागू की हैं, उन्हें आगे भी ऐसे कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इसी नीति के तहत इन देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है।
जानिए किन देशों पर कितना लगेगा शुल्क
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत कुल 60 देशों पर नए शुल्कों का ब्योरा जारी किया है। इस घोषणा के अनुसार भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित 17 देशों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की श्रेणी में रखा गया है, जबकि शेष 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत का भारी शुल्क लागू किया जाएगा।
चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों में वर्तमान में बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त और कड़े कानून मौजूद नहीं हैं। इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन ने इन्हें 12.5 प्रतिशत शुल्क वाली उच्च श्रेणी में शामिल किया है।
अमेरिकी प्रशासन ने घरेलू बाजार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण छूट भी दी हैं। ऐसा आवश्यक कच्चा माल, जिसकी आपूर्ति बाधित होने से अमेरिकी बाजार प्रभावित हो सकता है या जिसका उत्पादन अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में संभव नहीं है, उस पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। इसके अतिरिक्त, ऐसे उत्पाद भी इस अतिरिक्त शुल्क से मुक्त रहेंगे, जिनसे संपूर्ण अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा होने का जोखिम हो।
अमेरिका ने क्यों उठाया यह कठोर कदम?
यूएसटीआर के अनुसार, यह दंडात्मक कार्रवाई उन देशों पर केंद्रित है जो बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने में विफल रहे हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकना और ऐसे अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों पर लगाम लगाना है जो वैश्विक बाजार के संतुलन को बिगाड़ते हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से दुनिया भर के श्रमिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।
यह नया शुल्क उस अस्थायी 10 प्रतिशत आयात शुल्क का स्थान लेगा, जिसे फरवरी में लागू किया गया था। वह अंतरिम व्यवस्था उस समय लागू की गई थी जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में लागू राष्ट्रपति ट्रंप के “लिबरेशन डे” शुल्कों को अमान्य घोषित कर दिया था।
अमेरिका वर्तमान में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारतीय वस्तुओं के निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। वाणिज्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच कुल वस्तु व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें भारत से अमेरिका को हुआ निर्यात करीब 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था।


















