Himachal News: हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों और अध्यापकों की मांगों को लेकर सरगर्मी एक बार फिर बढ़ गई है। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान शिक्षा विभाग और कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि प्रदेश में पिछले काफी समय से तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए और साल में कम से कम दो बार आवश्यकता आधारित स्थानांतरण प्रक्रिया खोली जानी चाहिए।
वीरेंद्र चौहान ने कहा कि तबादले न होने से शिक्षकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पारिवारिक, मेडिकल और दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यकाल पूरा कर चुके शिक्षकों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। सरकार का यह तर्क कि तबादलों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। इसलिए संबंधित मंत्रालयों को शक्तियां देकर नियमानुसार पारदर्शी तरीके से तबादले किए जाने चाहिए।

डीओएफए से वरिष्ठता लाभ और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
पत्रकार वार्ता के दौरान संघ अध्यक्ष ने अनुबंध सेवा अधिनियम 2024 को रद्द करने संबंधी माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने याद दिलाया कि हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (एचजीटीयू) ने 2017 में ही प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता और ‘समान काम के लिए समान वेतन’ को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत के फैसलों के कारण वर्ष 2010 में नियुक्त कई अध्यापकों को 20-20 लाख रुपये तक का एरियर और वरिष्ठता लाभ प्राप्त हुए थे। सरकार द्वारा बनाए गए 2024 के अधिनियम को रद्द किए जाने के बाद अब सभी पात्र कर्मचारियों को नियुक्ति की पहली तारीख से ही एरियर और वरिष्ठता के लाभ मिलेंगे, जो अत्यंत सुखद अनुभव है।
वित्तीय मांगों पर एकजुटता की अपील, 15 अगस्त को 5% DA की उम्मीद
शिक्षकों और कर्मचारियों के वित्तीय हितों पर बात करते हुए वीरेंद्र चौहान ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के कर्मचारी महंगाई भत्ते (DA) के मामले में केंद्र और अन्य राज्यों से करीब 15 प्रतिशत पीछे चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जुलाई 2023 और जनवरी 2024 के बकाया डीए और एरियर का भुगतान अति शीघ्र होना चाहिए।
संघ ने माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे आगामी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश के कर्मचारियों के लिए कम से कम 5 प्रतिशत डीए की घोषणा अवश्य करें। उन्होंने राज्य के सभी कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे अपने मतभेदों को भूलकर वित्तीय मांगों और डीए के मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार के समक्ष अपनी बात रखें।
पदोन्नति, क्लस्टर सिस्टम और प्राथमिक शिक्षा में सुधार
राजकीय अध्यापक संघ ने शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए भी कई सुझाव और मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं:
- शिक्षकों की पदोन्नति: संघ ने टीजीटी से हेडमास्टर, जेबीटी और सीएंडवी कैडर की रुकी हुई पदोन्नतियां तुरंत करने की मांग की। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री ने टीजीटी से हेडमास्टर पदोन्नति को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
- क्लस्टर सिस्टम और प्रतिनियुक्ति: संघ ने क्लस्टर सिस्टम का समर्थन करते हुए कहा कि इससे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधरी है और हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में देश में पांचवें स्थान पर पहुंचा है। हालांकि, शिक्षकों की अस्थायी प्रतिनियुक्ति (Deputation) के बजाय खाली पदों पर नई सीधी भर्ती (New Recruitment) की जानी चाहिए ताकि जिस स्कूल से शिक्षक भेजा जा रहा है, वहां पढ़ाई प्रभावित न हो।
- सीबीएससी स्कूलों में स्थिरता: सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के स्थायी कैडर और स्पष्ट नीति की कमी के कारण छात्रों का नामांकन घट रहा है। सरकार को इस पर शीघ्र स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
- 5% अंतर-जिला तबादला कोटा: जेबीटी और सीएंडवी अध्यापकों का 5 प्रतिशत अंतर-जिला (Inter-District) ट्रांसफर कोटा तुरंत बहाल किया जाए।
- उप-निदेशक पदोन्नति और 20 वर्ष का ठहराव लाभ: संघ के प्रयासों से डिप्टी डायरेक्टर के पदों पर प्लेसमेंट के बजाय नई वेतन बढ़ोतरी के साथ नियमित पदोन्नति शुरू हुई है। इसके साथ ही, सीएंडवी अध्यापकों को 20 साल की सेवा के बाद मिलने वाले दो विशेष इंक्रीमेंट को दोबारा बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
वीरेंद्र चौहान ने अंत में कहा कि उनका संगठन 2014 से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम और प्री-प्राइमरी में नर्सरी टीचर भर्ती की मांग उठाता रहा है। संघ कर्मचारी हितों और शिक्षा में सुधार के लिए सदैव तत्पर है और उम्मीद करता है कि सरकार इन सभी न्यायसंगत मांगों को शीघ्र पूरा करेगी।


















