Dharmpur BLOCK Panchayat Tender Controversy: सोलन जिले के धर्मपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली कुछ ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए जारी की गई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में प्रकाशित निविदा सूचनाओं में कई तकनीकी और प्रक्रियात्मक गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। इन विसंगतियों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पंचायत कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रकाशित टेंडर नोटिस के मुख्य शीर्षक में पंचायत का नाम कुछ और दर्ज है, जबकि विज्ञापन के भीतर दी गई विस्तृत जानकारी में किसी दूसरी ही पंचायत का उल्लेख किया गया है। नाम में इस स्पष्ट भिन्नता के अलावा, सबसे बड़ी अनियमितता टेंडर जमा करने की तिथियों को लेकर सामने आई है। समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि और टेंडर फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि के बीच का समय अत्यंत सीमित नजर आ रहा है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या योग्य ठेकेदारों और ट्रेडरों को प्रक्रिया में भाग लेने के लिए नियमानुसार पर्याप्त समय दिया गया था।

मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह केवल एक साधारण मुद्रण या टाइपिंग की चूक है, अथवा इसके पीछे कोई प्रशासनिक लापरवाही या टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह पूछा जा रहा है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में यह विसंगतियां कैसे हुईं, इसके लिए कौन अधिकारी या प्रतिनिधि जिम्मेदार है और क्या सभी इच्छुक पक्षों को प्रतिस्पर्धा का समान अवसर प्राप्त हुआ।
इस पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए पंचायत इंस्पेक्टर धर्मपुर, राजिंदर वर्मा ने स्पष्ट किया है कि मीडिया के माध्यम से यह मामला उनके ध्यान में आया है। उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित तीनों ग्राम पंचायतों को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्देश दिए हैं कि त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के तहत जारी किए गए इन सभी टेंडरों को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायती राज नियमों के अनुसार, टेंडर नोटिस प्रकाशित होने के कम से कम 15 दिनों के बाद ही टेंडर अलॉट किए जाने का प्रावधान है, ताकि पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि समाचार पत्र में गलत टेंडर नोटिस छपवाने में जो भी सरकारी या पंचायत फंड खर्च हुआ है, उसकी भरपाई संबंधित पंचायत सचिव और ग्राम पंचायत प्रधान की व्यक्तिगत जेब से की जाएगी। प्रशासन के इस कड़े कदम से स्पष्ट है कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बता दें कि पंचायतों में निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले को सामने आने के बाद प्रजासत्ता ने बीते कल ही इसे प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद संबंधित पंचायतों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए गए।


















