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Sugar Price Hike in India: त्योहारी सीजन से पहले मिठास पड़ी फीकी, चीनी के दाम ने तोड़ा रिकॉर्ड, ₹5,500 प्रति क्विंटल पहुंची कीमत..!

Sugar Price Hike: आगामी 2026-27 चीनी सत्र की शुरुआत से पहले देश भर में चीनी की सप्लाई की तंगी गहरा गई है, जिससे मिल और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
Published on: 19 August 2026
Sugar Price Hike in India: त्योहारी सीजन से पहले मिठास पड़ी फीकी, चीनी के दाम ने तोड़ा रिकॉर्ड, ₹5,500 प्रति क्विंटल पहुंची कीमत..!

Sugar Price Hike in India: देश भर के चीनी बाजार में कीमतें अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। नए सत्र की शुरुआत से पहले मिलों में उपलब्ध स्टॉक की कमी के चलते मंगलवार को चीनी की औसतन मिल कीमत ₹5,400 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर को छू गई। गौरतलब है कि ठीक एक साल पहले यही मिल दर ₹3,900 प्रति क्विंटल थी। सालाना आधार पर दर्ज की गई यह भारी बढ़ोतरी सीधे तौर पर बाजार में सप्लाई की कमी की ओर इशारा करती है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मिल दरों में उछाल का सीधा असर आम जनता के बजट पर पड़ा है। 18 अगस्त को चीनी की औसतन खुदरा कीमत बढ़कर ₹52.3 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹46.34 प्रति किलोग्राम थी। इस प्रकार खुदरा कीमतों में सीधे 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

कीमतों में आई इस तेजी के पीछे मुख्य वजह 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले नए 2026-27 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए शुरुआती स्टॉक का कम होना है। देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कम से कम 50 लाख टन के शुरुआती स्टॉक की आवश्यकता मानी जाती है। हालांकि, सरकार ने अभी इसके आधिकारिक आंकड़े को अंतिम रूप नहीं दिया है, लेकिन उद्योग और विशेषज्ञों के बीच अनुमानों में भारी अंतर देखा जा रहा है।

उद्योग जगत का एक वर्ग का मानना है कि बचा हुआ स्टॉक 40 से 42 लाख टन के आसपास रह सकता है, जबकि स्वतंत्र शोधकर्ताओं के अनुसार यह आंकड़ा और घटकर 32 से 35 लाख टन ही रह सकता है। यदि यह अनुमान सच साबित होता है, तो नए सत्र की शुरुआत में ही चीनी की उपलब्धता पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।

इसकी तुलना यदि मौजूदा 2025-26 सत्र से करें, तो उसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 2025 को 47 लाख टन के शुरुआती स्टॉक के साथ हुई थी। चालू सत्र में 280 लाख टन के अनुमानित उत्पादन और 7 लाख टन के निर्यात को मिलाकर कुल उपलब्धता 320 लाख टन बैठती है। इसमें से 285 लाख टन की घरेलू खपत को घटाने के बाद केवल 35 लाख टन का बचा हुआ स्टॉक रह जाता है, जो 50 लाख टन की जरूरत से बेहद कम है।

सप्लाई और मांग के इस असंतुलन के बीच खाद्य मंत्रालय ने सख्त कदम उठाए हैं। मंत्रालय देश भर की चीनी मिलों द्वारा बेचे जा रहे स्टॉक पर लगातार कड़ी निगरानी रख रहा है। सभी मिलों को निर्देश दिया गया है कि वे ऑनलाइन फॉर्म और सत्यापित ईमेल आईडी के माध्यम से खरीदारों को बेचे गए तथा उनके द्वारा उठाए गए चीनी स्टॉक की सही जानकारी दें, ताकि देश में सप्लाई की वास्तविक स्थिति का सटीक खाका तैयार किया जा सके।

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