Naina Devi Temple Controversy: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी मंदिर की रसोई में एसडीएम धर्मपाल चौधरी के प्रवेश को लेकर उठा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। मंदिर के एक पुजारी अभिषेक शर्मा द्वारा एसडीएम पर धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है, जिसके बाद इस विवाद की शुरुवात हुई। बता दें कि एसडीएम धर्मपाल ही वर्तमान में श्री नैना देवी मंदिर न्यास के अध्यक्ष हैं।
विवाद बढ़ने के बाद अब मंदिर के मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा खुलकर प्रशासनिक अधिकारी के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने एसडीएम पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए शिकायतकर्ता के खिलाफ जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और मंदिर न्यास के अध्यक्ष की छवि खराब करने का आरोप लगाया है। जिसके बाद अब यह मामला एक नया ही मोड़ ले चूका है।
धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन का आरोप और पुलिस शिकायत
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब मंदिर के एक पुजारी अभिषेक शर्मा ने पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, जब माता की आरती के लिए भोग तैयार किया जा रहा था, उसी दौरान एसडीएम धर्मपाल चौधरी मंदिर की रसोई में दाखिल हुए। पुजारी का दावा था कि माता की रसोई के लिए विशेष धार्मिक नियम और परंपराएं निर्धारित हैं, जहां हर किसी का प्रवेश वर्जित है। उन्होंने आरोप लगाया था कि एसडीएम के रसोई में प्रवेश करने और बर्तन उठाने से माता का प्रसाद अशुद्ध हो गया।
निरीक्षण के लिए पहुंचे थे एसडीएम, आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर, एसडीएम धर्मपाल चौधरी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धार्मिक परंपरा को तोड़ने नहीं, बल्कि प्रशासनिक निरीक्षण के उद्देश्य से मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जिस समय वे निरीक्षण के लिए गए थे, उस वक्त मंदिर में कोई अनुष्ठान नहीं चल रहा था और न ही वहां कोई मुख्य पुजारी मौजूद थे।
मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा ने दी सफाई, खोला सच
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा ने एक वीडियो बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि बीते 17 अगस्त 2026 से मंदिर में मुख्य पुजारी के रूप में निरंतर सेवा दे रहे और रोजाना पांचों आरतियां कराते हैं। उन्होंने बताया कि 11 सितंबर 2026 को पंडित अभिषेक शर्मा द्वारा एसडीएम पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और गलत हैं। घटना के समय वे स्वयं वहां मौजूद थे और पूरी स्थिति सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में भी दर्ज है।
मुख्य पुजारी के अनुसार, एसडीएम ने रसोइयों को बालों में टोपी लगाने का निर्देश दिया था। पंडित अभिषेक शर्मा की मंदिर में कोई ड्यूटी नहीं थी, इसलिए एसडीएम ने उन्हें रोका था। उन्होंने कहा कि एसडीएम ने किसी भी प्रकार की धार्मिक परंपरा नहीं तोड़ी है। अभिषेक शर्मा केवल मंदिर न्यास और प्रशासनिक अधिकारी का नाम बदनाम करने के उद्देश्य से यह झूठे आरोप लगा रहा है।
जातिसूचक टिप्पणी और कानूनी कार्रवाई की मांग
मुख्य पुजारी प्रभात शर्मा ने खुलासा किया कि अभिषेक शर्मा ने उनके सामने एसडीएम धर्मपाल चौधरी के खिलाफ जातिसूचक और अशुद्ध शब्दों का प्रयोग किया, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने मंदिर की छवि खराब करने की कोशिश करने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ा कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
दलित नेता और गदर फ्रंट का कड़ा रुख
उधर, इस मामले में हिमाचल प्रदेश के दलित नेता और गदर फ्रंट के प्रमुख रवि कुमार दलित ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सही बात का पक्ष लेने के लिए सामान्य वर्ग के लोगों की सराहना की और पुलिस प्रशासन से तुरंत एक्शन लेने की मांग की।
रवि कुमार ने बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया कि प्रशासनिक अधिकारी पर की गई जातिसूचक टिप्पणी के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एट्रोसिटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने मुख्य पुजारी का बयान दर्ज कर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।


















