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Pitru Paksha 2026 Dates: श्राद्ध की तिथियां और धार्मिक महत्व, जानें इस साल कब से होगी शुरुआत.!

Shradh 2026 Start Date: पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान और दान का विशेष विधान है। जानिए साल 2026 में कब से शुरू हो रहे हैं श्राद्ध और क्या है सर्वपितृ अमावस्या की सही तिथि।
Published on: 22 September 2026
Pitru Paksha 2026 Dates: श्राद्ध की तिथियां और धार्मिक महत्व, जानें इस साल कब से होगी शुरुआत.!

Pitru Paksha 2026 Dates: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध की अवधि को विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त है। यह संपूर्ण समय पूर्वजों और पितरों को समर्पित होता है। सनातन परंपरा के अनुसार, इस अवधि में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और धर्म-कर्म से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितृ पक्ष मुख्य रूप से अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का एक पवित्र अवसर माना जाता है।

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, पितृ पक्ष की अवधि प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आती है। इसकी शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से होती है और इसका समापन आश्विन माह की अमावस्या तिथि को होता है। इस पूरी अवधि के दौरान श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मकांड संपन्न करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जो लोग इस दौरान नियमपूर्वक पितरों की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास बना रहता है।

पारिवारिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी इस अवधि का गहरा महत्व है। घर के बड़े-बुजुर्ग भले ही सशरीर हमारे बीच उपस्थित न रहें, लेकिन उनकी शिक्षाएं, आदतें और दिए गए संस्कार पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवार में जीवित रहते हैं। पितृ पक्ष इसी आत्मीय रिश्ते को स्मरण करने और सम्मान देने का पर्व है। इन दिनों में लोग अपने पूर्वजों के नाम से तर्पण करते हैं, ब्राह्मणों तथा ज़रूरतमंदों को भोजन कराते हैं और सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य करते हैं।

साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत सितंबर माह के अंतिम सप्ताह से होने जा रही है। धार्मिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत शनिवार, 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ होगी। इसके अगले दिन से आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की तिथियों के अनुसार क्रमशः दैनिक श्राद्ध कर्म संपन्न किए जाएंगे।

Pitru Paksha 2026 Dates: श्राद्ध की तिथियां और धार्मिक महत्व, जानें इस साल कब से होगी शुरुआत.!

पितृ पक्ष का समापन शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को होगा। इस अंतिम तिथि को सर्वपितृ अमावस्या, महालय अमावस्या या पितृ विसर्जन अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार वर्ष 2026 में श्राद्ध पक्ष कुल मिलाकर 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक मान्य रहेगा।

धार्मिक कर्मकांडों के संबंध में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सूर्योदय और स्थानीय गणना के आधार पर तिथियों के समय में स्थान विशेष के अनुसार आंशिक अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार के तर्पण या पिंडदान अनुष्ठान से पूर्व स्थानीय पंचांग का अवलोकन करना अथवा अपने कुल पुरोहित से सही समय की जानकारी प्राप्त करना उचित रहता है।

श्राद्ध एवं पितृ पक्ष 2026 कैलेंडर

तारीखदिनश्राद्ध तिथि / विशेष श्राद्ध
26 सितंबर 2026शनिवारपूर्णिमा श्राद्ध एवं पितृ पक्ष आरंभ
27 सितंबर 2026रविवारप्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर 2026सोमवारद्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026मंगलवारतृतीया श्राद्ध
30 सितंबर 2026बुधवारचतुर्थी श्राद्ध, महाभरणी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026गुरुवारपंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026शुक्रवारषष्ठी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026शनिवारसप्तमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026रविवारअष्टमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026सोमवारनवमी श्राद्ध, मातृ नवमी
6 अक्टूबर 2026मंगलवारदशमी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026बुधवारएकादशी श्राद्ध, द्वादशी श्राद्ध, मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर 2026गुरुवारत्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026शुक्रवारचतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026शनिवारसर्वपितृ अमावस्या एवं पितृ पक्ष समाप्त

श्राद्ध कर्म के मुख्य और आवश्यक नियम

  • श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय में ही करना चाहिए। प्रातः काल या संध्या के समय श्राद्ध करना वर्जित माना गया है।
  • श्राद्ध का भोजन तैयार करने के बाद सबसे पहले पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी) के लिए भोजन का अंश निकालें। कौए को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है, इसलिए उन्हें ग्रास देना अनिवार्य है।
  • श्राद्ध पूजा में काले तिल, जौ, कुशा (घास) और जल का उपयोग अनिवार्य रूप से करें। काले तिल से तर्पण करने पर पितर प्रसन्न होते हैं।
  •  श्राद्ध के दिन किसी सात्विक ब्राह्मण, भूखों और बच्चों को घर बुलाकर श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, तिल या दक्षिणा देकर विदा करें।

कैसे करें श्राद्ध?

पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए सही विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दोपहर के कुतूप मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, गंगाजल और काले तिल से तर्पण करने के बाद सात्विक भोजन से गाय, कुत्ते, कौए, और चींटी का अंश निकालना अनिवार्य होता है। इसके पश्चात किसी योग्य और सात्विक ब्राह्मण, भूखों और बच्चों को आदरपूर्वक भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा दी जाती है, जिससे प्रसन्न होकर पितर अपने वंशज को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

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