Khushwant Singh Litfest 2026: हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक कसौली क्लब में शुक्रवार को 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट-2026 की शुरुआत हो गई। पहाड़ों और देवदार के पेड़ों के बीच आयोजित इस प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन की इस बार की थीम ‘असहमति की कला : मतभेदों के पार संवाद’ तय की गई है। तीन दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में इतिहास, साहित्य, प्रेम, राजनीति, महिला अधिकार और आस्था जैसे विभिन्न गंभीर विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है।
इस लिटफेस्ट के पहले दिन की शुरुआत सरबप्रीत सिंह के सत्र ‘ए मेलोडियस प्रीफेस : ख्वाबगाह : द हाउस ऑफ ड्रीम्स’ से हुई। इसके बाद फेस्टिवल के डायरेक्टर और दिवंगत खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अपने पिता को अनुशासनप्रिय और हास्यबोध के बेजोड़ उदाहरण के रूप में याद किया। वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका बची करकरिया ने भी खुशवंत सिंह के साथ अपने लंबे कामकाजी जुड़ाव को साझा किया।

जनरल नरवणे ने की ‘केएसएलएफ फॉरएवर यंग’ की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे ने ‘केएसएलएफ फॉरएवर यंग’ पहल का शुभारंभ किया। इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य युवा और उभरते लेखकों को रचनात्मक लेखन के प्रति प्रेरित करना है। युवा लेखकों को संबोधित करते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि सेना और लेखन दोनों ही महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुशासन का होना बेहद अनिवार्य है।
जनरल नरवणे ने युवा लेखकों से अपील की कि वे गंभीर मुद्दों पर बिना किसी व्यक्तिगत दुर्भावना के अपनी बात रखें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वैचारिक मुद्दों पर असहमति जरूर जताएं, लेकिन किसी भी व्यक्ति का अनादर न करें। निडर लेखन का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि लेखकों को हमेशा जिम्मेदारी के साथ लिखना चाहिए तथा तलवार की तरह ही कलम का इस्तेमाल भी पूरे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए।
महिला अधिकारों और मिजोरम के इतिहास पर चर्चा
लिटफेस्ट के विभिन्न सत्रों में सामाजिक और ऐतिहासिक मुद्दों पर खुलकर बात रखी गई। ‘गर्ल्स जस्ट वांट टू हैव फंडामेंटल राइट्स’ सत्र में वकील और लेखिका मिहिरा सूद ने कहा कि केवल कानूनी सुधारों के माध्यम से लैंगिक समानता को पूरी तरह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है।
इसके अलावा ‘मिजोरम : बैटलफील्ड से बैलेट बॉक्स तक’ सत्र में लेखक संजय हजारिका ने मिजोरम के सशस्त्र विद्रोह से लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था तक के सफर पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपनी पुस्तक के संदर्भ में मिजोरम नेशनल फ्रंट और 1986 के मिजो शांति समझौते के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
खानपान, विज्ञान, आस्था और मानसिक स्वास्थ्य पर मंथन
उत्सव के अन्य सत्रों में खानपान, विज्ञान और आध्यात्मिकता जैसे विविध विषयों को भी शामिल किया गया। शेफ राहुल अकेरकर ने अपने बायोकेमिकल इंजीनियरिंग से पाक कला तक के सफर को साझा किया। वहीं, वैज्ञानिक उपासना सरराजू ने जिज्ञासा और लीक से हटकर सोचने की अहमियत बताई।
लेखक रूपिंदर सिंह और कमला कपूर ने सिख परंपरा में सेवा तथा गुरु ग्रंथ साहिब की आध्यात्मिक भूमिका पर चर्चा की। मनोवैज्ञानिक निष्ठा लांबा ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर विचार रखे। लेखक अलेक्जेंडर कोपेलमैन ने कार्यशाला के जरिए विद्यार्थियों को अपनी विशिष्टता अपनाने के लिए प्रेरित किया।



















