YK Sabharwal Sons Property Case: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल के बेटों चेतन सभरवाल और नितिन सभरवाल से जुड़े मामलों में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली में संपत्ति की खरीद और शेयरों की खरीद-बिक्री के मामले में आयकर विभाग द्वारा की जाने वाली दोबारा जांच का रास्ता पूरी तरह से साफ कर दिया है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने वित्तीय वर्ष 2008-09 और 2009-10 के लिए जारी किए गए री-असेसमेंट नोटिस को कानूनी रूप से वैध ठहराते हुए दोनों भाइयों की कुल चार अपीलें खारिज कर दी हैं। इस न्यायिक निर्णय के बाद आयकर विभाग के अधिकारियों को इस हाई-प्रोफाइल मामले की नए सिरे से गहराई से छानबीन करने का अधिकार मिल गया है, जिससे दोनों भाइयों की मुश्किलें काफी हद तक बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।
क्या है पूरा मामला और सिकंदरा रोड प्रॉपर्टी विवाद
यह पूरा कानूनी विवाद मुख्य रूप से नई दिल्ली के पॉश इलाके सिकंदरा रोड पर अप्रैल 2010 में खरीदी गई एक बेहद महंगी और बहुमूल्य संपत्ति से जुड़ा हुआ है। आयकर विभाग के पास उपलब्ध खुफिया जानकारियों और शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर यह आशंका जताई गई थी कि इस भारी-भरकम संपत्ति को खरीदने के लिए उपयोग की गई धनराशि वास्तव में दो अलग-अलग निजी कंपनियों के शेयरों को बेचकर जुटाई गई थी।
विभाग की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई कि शेयरों की बिक्री के दौरान जो कीमत कागजों में तय की गई थी और उन कंपनियों की वास्तविक संपत्तियों का जो बाजार मूल्य था, उसके बीच एक बहुत बड़ा और संदिग्ध अंतर मौजूद था। इसी वित्तीय असंतुलन और विसंगति को लेकर आयकर विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसकी अब विस्तृत जांच की जाएगी।
शेयरों की बिक्री और करोड़ों रुपये के सौदे का गणित
इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए आयकर विभाग ने अक्टूबर 2007 के उस बड़े शेयर बिक्री समझौते को आधार बनाया है, जिसके तहत चेतन सभरवाल और नितिन सभरवाल समेत कुल चार शेयरधारकों ने दो प्रमुख कंपनियों के शेयर बेचे थे। ये कंपनियां पवन इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड थीं, जिनके शेयरों को जीवाईएस रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को बेचने का एक औपचारिक समझौता तैयार किया गया था।
इस तय समझौते के अंतर्गत दोनों कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत भारी-भरकम यानी लगभग 195 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस व्यावसायिक सौदे के नियमों और शर्तों के अनुसार, प्रत्येक शेयरधारक को इस संपूर्ण बिक्री से प्राप्त होने वाली कुल रकम का 25 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर मिलना तय हुआ था, जिसके वित्तीय लेन-देन अब जांच के दायरे में आ गए हैं।
कैपिटल गेन टैक्स छूट का दावा और आयकर विभाग का संदेह
आयकर विभाग की गहन छानबीन के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य खुलकर सामने आया कि शेयरों की बिक्री से जो भारी रकम प्राप्त हुई थी, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर दिल्ली के सिकंदरा रोड स्थित उसी विवादित संपत्ति को खरीदने में निवेश किया गया था। दोनों सभरवाल भाइयों ने इस प्रकार किए गए निवेश के कानूनी आधार पर आयकर कानून की धारा 54F के तहत कैपिटल गेन टैक्स में भारी-भरकम छूट का दावा किया था और इसका लाभ उठाने की कोशिश की थी।
हालांकि, आयकर विभाग को अपनी तकनीकी जांच के दौरान यह गंभीर संदेह हुआ कि शेयरों की बिक्री की जो कीमत दिखाई गई थी, वह उनके वास्तविक बाजार मूल्य से काफी अधिक थी। विभाग का मानना है कि इस बढ़ी हुई कीमत और व्यवस्था के जरिए सरकारी खजाने की टैक्स देनदारी को सीधे तौर पर प्रभावित करने या बचाने का प्रयास किया गया था, जिसकी अब कानूनी पुष्टि की जाएगी।




















