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मनोज के ज़हन में आज भी सड़क हादसे का मंज़र ताज़ा, हादसे के बाद 6 माह कोमा में रहा

मनोज के ज़हन में आज भी सड़क हादसे का मंज़र ताज़ा, हादसे के बाद 6 माह कोमा में रहा
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सुभाष कुमार गौतम/घुमारवीं
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला के अंतर्गत पड़ने वाली ग्राम पंचायत डंगार के सौग का यह युवक बेहद साधारण है| जैसे मानों किसी ने जिंदगी ही छीन ली है| कुछ साल पहले जब अपने पिता की दुकान के लिए सामान लाने सुबह नौ बजे घर से निकला तो कुछ दूरी पर एक युवक ने अपनी गाड़ी से मनोज को टक्कर मार दी|

हादसे में मनोज का सिर ही फट गया हालांकि इतनी भीषण टक्कर के बाद गाड़ी चालक मौके पर से भाग निकला| लोगों ने देखा भी पर किसी ने गवाही देने की हिम्मत ना समझी और घायल मनोज सड़क पर रेंगता रहा| असहाय मनोज किसी ने फिर देख लिया और तुरंत अस्पताल ले गए|

हादसे की न तो कोई पुलिस रिपोर्ट हुई क्योंकि मनोज का परिवार गुरबत का जीवन यापन कर रहा था इलाज़ पीजीआई चंडीगढ़ में चला और छः महीने मनोज कोमा में रहा लाखों रूपए खर्च किए अब साधारण जिंदगी बिता रहा है और कहता है साहब कभी तो ऐसा लगता था कि जिंदगी बेकार और अपाहिज हो गई है और जहर खाने को दिल करता था आज दिहाड़ी मजदूरी करके पेट पालता हूं|

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भगवान का खेल देखो आज भी मनोज को उस व्यक्ति की सकल और गाड़ी नंबर याद है लेकिन भगवान पर भरोसा है कि मौके के गवाह तो मुकर गए हैं| लेकिन भगवान उसके साथ हमेशा न्याय करेगा और इस उम्मीद के साथ जिन्दगी बिता रहा है| हो सकता है वो अपने जीवन के संघर्ष में सफल हो जाए और उसकी जिंदगी जो अपाहिज हुई है उसका उसे कोई मुआवजा दिला सके आज भी उसे यही उम्मीद है कि आखिर उसको मारने की कोशिश करने वाले के खिलाफ कोई कानून नहीं है जो उसे मरी हालत में सड़क पर बिलखता छोड़ गया था|

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