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Gambhari Devi Himachal Folk Singer: गम्भरी देवी के लोक संगीत पर शोध करेंगे आयुष शर्मा, हिमाचल के पहले लेखक बने

Himachal Pradesh Cultural Heritage: प्रधानमंत्री युवा लेखक परामर्श योजना के तहत बिलासपुर के आयुष शर्मा का चयन हुआ है, जो विख्यात लोकगायिका स्वर्गीय गम्भरी देवी के सांस्कृतिक योगदान और पहाड़ी परंपराओं पर विस्तृत शोध करेंगे।
Published on: 11 April 2026
Gambhari Devi Himachal Folk Singer: गम्भरी देवी के लोक संगीत पर शोध करेंगे आयुष शर्मा, हिमाचल के पहले लेखक बने

Gambhari Devi Himachal Folk Singer: हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत को वैश्विक पटल पर नई पहचान मिलने जा रही है। प्रदेश के युवा लेखक आयुष शर्मा ‘प्रधानमंत्री युवा लेखक परामर्श योजना’ के अंतर्गत राज्य की प्रतिष्ठित लोकगायिका स्वर्गीय गम्भरी देवी के जीवन और उनके सांस्कृतिक योगदान पर गहन शोध कार्य करेंगे। इस शोध पत्र को भविष्य में राष्ट्रीय बुक ट्रस्ट (NBT) द्वारा प्रकाशित किया जाएगा।

भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत देशभर से 30 वर्ष से कम आयु के कुल 43 प्रतिभाशाली लेखकों का चयन किया गया है। उल्लेखनीय है कि आयुष शर्मा इस सूची में स्थान बनाने वाले हिमाचल प्रदेश के एकमात्र और पहले लेखक हैं।

मूल रूप से बिलासपुर जिले के चल्हेली गांव के निवासी आयुष वर्तमान में जयपुर स्थित मनिपाल यूनिवर्सिटी से बी.बी.ए. की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता ज्ञान चंद प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में सेवारत हैं और माता अनिता देवी एक कुशल गृहिणी हैं। आयुष का चयन प्रदेश के साहित्यिक और सांस्कृतिक हलकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह शोध कार्य दिल्ली विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. कमला कौशिक के मार्गदर्शन में संपन्न होगा। डॉ. कौशिक, जो मूलतः मंडी जिले के गोहर से संबंध रखती हैं, स्वयं हिमाचल के लोक संगीत पर गहन शोध कर चुकी हैं। उनके अनुभव का लाभ आयुष के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को प्राप्त होगा।

विख्यात लोकगायिका गम्भरी देवी का जन्म वर्ष 1922 में बिलासपुर के बंदला गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी मधुर आवाज के माध्यम से पहाड़ी लोक जीवन और परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाया। उनके कालजयी गीत “खाणा पीणा नंद लेणी ओ गंभरिए…” की लोकप्रियता आज भी बरकरार है और यह हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है।

गम्भरी देवी के अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2001 में हिमाचल अकादमी ऑफ आर्ट्स के अचीवमेंट अवॉर्ड और वर्ष 2011 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रतिष्ठित ‘टैगोर अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। 8 जनवरी 2013 को उनका देहावसान हुआ, लेकिन उनके द्वारा संरक्षित लोक विरासत आज भी शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
-Dr G.L. Mahajan –

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