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गैंगस्टर सन्नी गिल पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला करने वाले पांचों आरोपियों को अदालत ने चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा

बिलासपुर में सन्नी गिल पर कुल्हाड़ी से हमला करने वाले पांचों आरोपियों को अदालत ने चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा। पुलिस 2024 के गोलीकांड से इसके कनेक्शन और फरार होने में प्रयुक्त आठ वाहनों की जांच कर रही है।
Bilaspur Kulhadi Kand: गैंगस्टर सन्नी गिल पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला करने वाले पांचों आरोपियों को अदालत ने चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा

Bilaspur Kulhadi Kand: बिलासपुर के बहुचर्चित गोलीकांड मामले में पेशी के लिए आ रहे लुधियाना निवासी सन्नी गिल पर मंडी-भराड़ी में कुल्हाड़ी और रॉड से जानलेवा हमला करने के आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

पुलिस इस रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से हमले के मुख्य कारणों और इस गहरी साजिश में शामिल अन्य पहलुओं पर गहन पूछताछ करेगी। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित सन्नी गिल बीते बुधवार को वर्ष 2024 में हुए बिलासपुर अदालत गोलीकांड मामले की अदालती कार्रवाई और पेशी के लिए लुधियाना से बिलासपुर आ रहा था। इसी दौरान मंडी-भराड़ी के समीप घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उस पर अचानक धावा बोल दिया।

आरोपियों ने पीड़ित को गंभीर रूप से घायल करने के इरादे से लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। इस बर्बर हमले को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों की पहचान सौरभ पटियाल उर्फ फांदी (निवासी नसवाल) और कुलभूषण उर्फ लक्की (निवासी तरेड़) के रूप में हुई है। मंडी-भराड़ी में सन्नी गिल को लहुलूहान करने के बाद दोनों आरोपी तुरंत मौके से फरार हो गए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वारदात को अंजाम देने और उसके बाद फरार होने की इस पूरी योजना में तीन अन्य लोगों ने उनकी सक्रिय रूप से सहायता की थी।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों को सुरक्षित भगाने और वारदात में सहयोग करने में सूर्या चंदेल (निवासी दड़ोलां, झंडूता), धीरज धर्माणी (निवासी बाड़ी करंगोड़ा, घुमारवीं) और अनिल ने मुख्य भूमिका निभाई। बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान ने इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि की है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना के महज 28 घंटे के भीतर सभी पांचों आरोपियों को धर-दबोचा।

इस सनसनीखेज मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस के सामने एक चौंकाने वाला तथ्य आए। वारदात को अंजाम देने के बाद भराड़ी से लेकर बंजार तक सुरक्षित पहुंचने के लिए आरोपियों ने कुल आठ अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने अब इन सभी आठ वाहनों की पहचान कर ली है और इनके मालिकों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच में वाहन मालिकों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ें वर्ष 2024 में हुए बिलासपुर कोर्ट गोलीकांड से जुड़ी हुई हैं। उस समय बिलासपुर अदालत परिसर के भीतर एक लड़ाई-झगड़े के आरोपी पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गई थीं। उस बहुचर्चित मामले में हिमाचल प्रदेश के एक पूर्व विधायक के बेटे का नाम भी सामने आया था, जिसे बाद में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। तभी से दोनों पक्षों के बीच गहरी आपसी रंजिश और विवाद लगातार चला आ रहा है।

इस पुरानी रंजिश के इतिहास में पूर्व विधायक बंबर ठाकुर पर भी पूर्व में गोलियां चल चुकी हैं। बिलासपुर पुलिस अब इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही है कि क्या इन पुरानी घटनाओं का मौजूदा कुल्हाड़ी हमले से कोई सीधा कनेक्शन है या नहीं। बहरहाल, देवभूमि में लगातार हो रही इस तरह की हिंसक वारदातों ने हिमाचल प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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