Himachal News: हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की राज्य कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक हमीरपुर जिले के तर्कवाड़ी स्थित होटल ग्रीन हिल गेस्ट हाउस एवं रेस्टोरेंट में आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरोत्तम वर्मा ने की। बैठक के दौरान संघ के नेताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग का ध्यान शिक्षकों की लंबित समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार के कार्यकाल के लगभग 3.5 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी वर्ग और विशेष रूप से अध्यापक वर्ग सरकार की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। शिक्षकों की जायज मांगों का समय पर समाधान न होना इसका मुख्य कारण है। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के समक्ष 17 प्रमुख मांगों का एजेंडा रखा है।

संघ की पहली मुख्य मांग लंबित महंगाई भत्ते (डीए) का एरियर सहित तुरंत भुगतान करना और 15 प्रतिशत लंबित डीए की सभी किश्तों की अदायगी एक मुश्त करना है। इसके साथ ही छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर बकाया एरियर के शीघ्र भुगतान की मांग भी उठाई गई है।
शिक्षकों की पदोन्नति के मुद्दे पर संघ ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति सूची जारी नहीं की गई है, जिससे सभी वर्गों के अध्यापकों की पदोन्नतियां अटकी पड़ी हैं। संघ ने मांग की है कि शैक्षिक सत्र के प्रारंभ में ही विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित कर पूरे वर्ष के लिए एक पैनल तैयार किया जाए ताकि पद रिक्त न रहें। इसके अलावा, एक ही पद या कैडर में 15 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले अध्यापकों को दो विशेष वेतन वृद्धियां देने का प्रावधान किया जाए।
कर्मचारी भत्तों के संदर्भ में संघ ने मांग की है कि लंबे समय से फ्रीज या असंशोधित भत्तों को पंजाब अथवा केंद्र सरकार की तर्ज पर संशोधित कर प्रदान किया जाए। वहीं, अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु को 58 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने और 300+10 से अधिक अर्जित अवकाश को खाते में जमा करने का प्रावधान करने की बात कही गई है।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए संघ ने प्राथमिक विद्यालयों में हर कक्षा के लिए एक शिक्षक की नियुक्ति का सुझाव दिया है। संघ ने अध्यापकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही, राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6 प्रतिशत बजट शिक्षा पर खर्च करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप युक्तिकरण प्रक्रिया लागू करने की वकालत की है।
संघ ने आउटसोर्स और कंप्यूटर शिक्षकों को शिक्षा विभाग में समायोजित करने के लिए ठोस नीति बनाने तथा सभी डीपीई अध्यापकों को नियमों में एकमुश्त छूट देकर प्रवक्ता स्कूल न्यू (शारीरिक शिक्षा) का पदनाम देने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, 07 जुलाई 2023 के उस कार्यालय ज्ञापन को वापस लेने की मांग की गई है, जिसके तहत प्रथम श्रेणी के राजपत्रित अधिकारियों को कार्यभार के लिए जिला शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। गैर-पंजीकृत संगठनों की गतिविधियों पर भी तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरोत्तम वर्मा और प्रदेश महासचिव संजीव ठाकुर ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस 17 सूत्रीय एजेंडे पर गंभीरता से विचार करेगी और शीघ्र ही संघ के प्रतिनिधिमंडल को विस्तृत चर्चा के लिए बैठक का समय देगी।
बैठक में मुख्य संरक्षक नरेश महाजन,राज्य महासचिव संजीव ठाकुर, संरक्षक राकेश शर्मा, रत्ती राम वर्मा,राज्य वित्त सचिव सतीश पुडीर,वरिष्ठ उप प्रधान पंकज शर्मा, सुरेश नरयाल,उप प्रधान जोगिंदर,चीफ प्रेस सचिव कश्मीरी लाल, प्रेस सचिव सुरेश ठाकुर, मुख्य सलाहाकार कमल राज अत्री,चेयरमैन स्टीरिंग कमेटी सुनील शर्मा, जिला प्रधान बिलासपुर से राम लोक ,हमीरपुर से राज कुमार, कांगड़ा से नरेश धीमान, मंडी से अश्विनी गुलेरिया,सोलन से गुरमेल सिंह चौधरी,सिरमौर से हरदेव ठाकुर,उना से मुकेश जिला महामंत्री,पूर्व राज्य अध्यक्ष प्यारू राम सन्ख्यान,पूर्व राज्य महासचिव अजय शर्मा व सहित करीब 75 पदाधिकारियों और सदस्यों ने हिस्सा लिया।


















